महाराष्ट्र सरकार ने Mahatransco, MSEDCL और Mahagenco के निजीकरण की योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसके बजाय, सरकार अब MSEDCL के गैर-कृषि व्यवसाय का IPO लाने की तैयारी कर रही है, जिससे **₹8,000 करोड़** से **₹10,000 करोड़** तक जुटाने का लक्ष्य है।
IPO की रणनीति और वित्तीय सफाई
सरकार का मुख्य उद्देश्य कंपनी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है। इस IPO के लिए सरकार ने 8 इन्वेस्टमेंट बैंकों को नियुक्त किया है। जुटाई गई राशि का उपयोग ग्रिड के आधुनिकीकरण और कंपनी के भारी कर्ज को कम करने में किया जाएगा।
कर्ज का बोझ कम करने की कवायद
MSEDCL पर फिलहाल ₹80,000 करोड़ से ₹96,000 करोड़ तक का कर्ज है। इसे सुधारने के लिए सरकार ने ₹32,679 करोड़ का कर्ज खुद लेने का फैसला किया है, जिसे 15 साल के बॉन्ड के जरिए चुकाया जाएगा। इससे कंपनी की बैलेंस शीट में सुधार की उम्मीद है।
कंपनी का पुनर्गठन (Restructuring)
योजना के तहत MSEDCL को दो भागों में बांटा जाएगा: एक गैर-कृषि वितरण कंपनी और दूसरी 'MSEB Solar Agro Power Ltd'। कृषि क्षेत्र को सोलर मॉडल पर शिफ्ट करने से कंपनी की लंबी अवधि की लागत कम होगी।
विरोध और चुनौतियां
हालांकि सरकार निजीकरण से बच रही है, लेकिन लेबर यूनियन ने IPO का विरोध शुरू कर दिया है। उन्हें डर है कि यह निजीकरण की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। इसके अलावा, डिमर्जर की जटिल प्रक्रिया और समय पर कार्यान्वयन, दिसंबर 2026 की डेडलाइन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
