महाराष्ट्र सरकार ने छात्रों के भारी विरोध के बाद MPSC के कामकाज की **3 महीने** लंबी न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने ऑफलाइन एग्जाम पैटर्न को बरकरार रखा है और जनवरी में होने वाली ग्रुप-सी भर्ती में वैकेंसी बढ़ाने का वादा किया है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य लोक सेवा आयोग (MPSC) के कामकाज की गहराई से समीक्षा करने के लिए एक औपचारिक न्यायिक जांच का ऐलान किया है। यह कदम राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत होने वाली यह जांच 3 महीने के भीतर पूरी की जाएगी, जिसमें आयोग के वर्तमान और पूर्व अध्यक्षों व सदस्यों के कामकाज की समीक्षा होगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग के सचिव का तत्काल तबादला भी कर दिया गया है।
भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि MPSC परीक्षाएं ऑफलाइन फॉर्मेट में ही आयोजित की जाएंगी, जिससे उन छात्रों को राहत मिली है जो अचानक बदलाव की आशंका से चिंतित थे। साथ ही, 3 जनवरी को होने वाली ग्रुप-सी परीक्षाओं में अधिक उम्मीदवारों को मौका देने के लिए रिक्तियों (vacancies) की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने यह भी बताया है कि सरकारी विभागों में भर्ती के नियमों को बदलने का काम 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है और बाकी बचे 40 प्रतिशत पर काम तेजी से जारी है।
भविष्य की प्रशासनिक सुधार योजनाएं
आने वाले समय में भर्ती बैकलॉग को खत्म करने के लिए सरकार ने 3 साल के चक्र में वैकेंसी घोषित करने की योजना बनाई है। रिटायरमेंट के कारण खाली होने वाले पदों के लिए प्रक्रिया अब 1 साल पहले ही शुरू कर दी जाएगी। इसके अलावा, छात्रों को बार-बार डॉक्यूमेंट्स के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए एक सिंगल-कार्ड सिस्टम और सेंट्रलाइज्ड पोर्टल बनाया जा रहा है। सरकार अगले 30 दिनों के भीतर एक निश्चित रिक्रूटमेंट कैलेंडर जारी करने की तैयारी कर रही है, जो भविष्य की भर्तियों में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने का काम करेगा।
