महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के **305** तालुकों में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पेंडिंग वाटर प्रोजेक्ट्स को **25 अक्टूबर** तक पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया है। जल जीवन मिशन के तहत सरकार अब टैंकरों की निर्भरता खत्म कर स्थाई इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है।
महाराष्ट्र के जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को उन वाटर प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने का स्पष्ट निर्देश दिया है, जो 75% तक पूरे हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बिना किसी प्रशासनिक देरी के फंड रिलीज किया जाए ताकि सूखा प्रभावित इन इलाकों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।\n\nइस नई रणनीति के तहत पाइपलाइनों, पंपों और पावर कनेक्शन जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द चालू करने पर फोकस किया गया है। जिम्मेदारी अब जिला परिषदों और ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है ताकि इमरजेंसी टैंकरों पर निर्भरता कम की जा सके।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है मायने?\n\nइन्वेस्टर पॉइंट ऑफ व्यू से यह कदम पाइप, पंप, वाल्व और वाटर ट्रीटमेंट सॉल्यूशंस बनाने वाली कंपनियों के लिए अहम है। सरकारी खर्च में तेजी आने से इन कंपनियों के ऑर्डर एग्जीक्यूशन और वर्किंग कैपिटल में सुधार देखने को मिल सकता है।\n\nहालांकि, सूखा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा रिस्क बना हुआ है। अगर जल संकट जारी रहा, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे ट्रैक्टर, फर्टिलाइजर्स और FMCG जैसे सेक्टरों में डिमांड घट सकती है। बाजार की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्थानीय निकाय 25 अक्टूबर की डेडलाइन तक इन प्रोजेक्ट्स को हकीकत में बदल पाते हैं या नहीं।
