मानसून की **18.8%** कमी के कारण महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 265 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। यह स्थिति रबी फसल चक्र और ग्रामीण डिमांड को प्रभावित कर सकती है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
महाराष्ट्र सरकार ने 26 सितंबर, 2026 को राज्य के कुल 358 में से 265 तालुकाओं को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। राज्य में बारिश की 18.8% कमी के कारण खरीफ फसल चक्र पूरी तरह से बाधित हो गया है। मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्र इस समय एल नीनो (El Niño) के असर से जूझ रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण वित्तीय स्थिरता पर गहरा संकट पैदा हो गया है।
ग्रामीण डिमांड पर असर
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण खपत में आने वाली गिरावट है। ग्रामीण क्षेत्रों में कमाई कम होने से FMCG, टू-व्हीलर और ट्रैक्टर कंपनियों की बिक्री पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि किसानों की आय प्रभावित होती है, तो कंपनियां अपने तिमाही नतीजों में दबाव देख सकती हैं।
महंगाई और सप्लाई का जोखिम
सूखे के कारण सोयाबीन, कपास, मक्का और दालों जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार घटने की आशंका है। आपूर्ति कम होने से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल आ सकता है। कपास आधारित टेक्सटाइल और ऑयलसीड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा।
बैंकिंग सेक्टर पर दबाव
सरकार ने फसल कर्ज रीस्ट्रक्चरिंग और बिजली बिल माफी जैसे राहत उपायों की घोषणा की है। हालांकि, इससे ग्रामीण कर्ज देने वाले बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं की एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार के खजाने पर भी राहत पैकेज और मुआवजे का भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। अब सबकी नजरें जिला कलेक्टरों द्वारा किए जा रहे 'पंचनामा' सर्वे पर हैं, जिससे नुकसान का सही अंदाजा लग पाएगा और भविष्य में रबी फसल की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
