MSME News: सरकारी खरीद में MSME का दबदबा, मिला **53%** हिस्सा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
MSME News: सरकारी खरीद में MSME का दबदबा, मिला **53%** हिस्सा

FY27 की पहली छमाही में MSMEs ने सरकारी खरीद में **₹48,635 करोड़** के ऑर्डर हासिल किए हैं। यह अनिवार्य **25%** कोटा से काफी ज्यादा है, लेकिन पेमेंट में देरी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सरकारी खरीद में रिकॉर्ड भागीदारी

वित्त वर्ष 2027 (FY27) की पहली छमाही में माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSEs) ने सरकारी खरीद में शानदार प्रदर्शन किया है। इस दौरान कुल ₹90,745 करोड़ की सरकारी खरीद में से ₹48,635 करोड़ के ठेके छोटे उद्योगों को मिले, जो कुल खरीद का 53% है। यह आंकड़ा सरकार द्वारा निर्धारित 25% के अनिवार्य लक्ष्य को कहीं पीछे छोड़ देता है।

डिजिटल बदलाव और ग्रोथ

इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह 'उद्यम' (Udyam) रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए सेक्टर का फॉर्मलाइजेशन है, जिसमें अब 9.7 करोड़ से ज्यादा यूनिट्स शामिल हैं। डिजिटल इनवॉइसिंग और टेंडरिंग प्रोसेस में पारदर्शिता आने से छोटी कंपनियों के लिए बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला करना आसान हो गया है। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं ने भी सरकारी खरीदारों को घरेलू और विश्वसनीय स्रोतों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया है।

चुनौतियां और रिस्क फैक्टर्स

हालांकि आंकड़े मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन सेक्टर के सामने पेमेंट में देरी की पुरानी समस्या अब भी बनी हुई है, जो वर्किंग कैपिटल और लिक्विडिटी पर दबाव डालती है। सरकारी खरीद में बढ़ती भागीदारी का एक दूसरा पहलू 'सरकारी मांग' पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता है। जो कंपनियां पूरी तरह सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिकी हैं, उनके लिए बजट में किसी भी तरह का बदलाव या सरकारी खर्च में कमी भविष्य में बड़ा रिस्क पैदा कर सकती है। सेक्टर के जानकारों का मानना है कि टीआरईडीएस (TReDS) जैसे प्लेटफॉर्म्स के प्रभावी इस्तेमाल से ही कैश-फ्लो की दिक्कतों को दूर किया जा सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.