मध्य प्रदेश की Economic Offences Wing (EOW) ने सरकारी कंप्यूटर खरीद टेंडर में **₹10.99 करोड़** के बड़े घोटाले का खुलासा किया है। मामले में फर्जी बोली और घटिया माल सप्लाई करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
मध्य प्रदेश की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EOW) ने राज्य के 'सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ डिसेबिलिटीज डिपार्टमेंट' के लिए हुए कंप्यूटर हार्डवेयर टेंडर में भारी अनियमितताएं पकड़ी हैं। जांच के दायरे में ₹10.99 करोड़ की सरकारी खरीद है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया को ही पूरी तरह से मैनिपुलेट किया गया।
फर्जीवाड़े का जाल
जांच में सामने आया कि 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM) पर टेंडर भरने वाली चार कंपनियां आपस में मिली हुई थीं। इन सभी कंपनियों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और जीएसटी रजिस्ट्रेशन डिटेल्स बिल्कुल एक जैसी पाई गईं। इन्होंने बाजार में प्रतिस्पर्धा का दिखावा तो किया, लेकिन असल में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए यह सब पहले से तय था।
पुराना सामान, नई पैकिंग
घोटाला सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्वालिटी से भी बड़ा समझौता किया गया। सरकारी दफ्तरों में जो हार्डवेयर जुलाई 2024 में लगाए गए थे, उन्हें ही सितंबर 2024 में हुए टेंडर के लिए 'नया' बताकर बेच दिया गया। इतना ही नहीं, हाई-परफॉर्मेंस पार्ट्स की जगह स्थानीय स्तर पर बने सस्ते रैम (RAM) और एसएसडी (SSD) का इस्तेमाल किया गया।
भारी ओवरप्राइसिंग
वित्तीय गड़बड़ी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस यूपीएस (UPS) की बाजार कीमत करीब ₹3,754 थी, उसे सरकारी खजाने से ₹11,247 की दर पर खरीदा गया।
आगे की कानूनी कार्रवाई
EOW ने चार लोगों के खिलाफ 'भारतीय न्याय संहिता' के तहत FIR दर्ज की है। अथॉरिटीज ने इन सभी कंपनियों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की सिफारिश की है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर कैसे इन घटिया उपकरणों को शुरुआती क्वालिटी चेक के दौरान पास कर दिया गया था।
