Ministry of Home Affairs (MHA) ने एक हाई-प्रायोरिटी साइबर अलर्ट जारी किया है। जालसाज अब डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल करके फर्जी सरकारी योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं और लोगों से UPI के जरिए अवैध वसूली कर रहे हैं। सरकार ने साफ किया है कि किसी भी सरकारी स्कीम के लिए एडवांस पेमेंट की जरूरत नहीं होती।
गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने डीपफेक तकनीक के बढ़ते खतरों को लेकर नागरिकों को आगाह किया है। Indian Cyber Crime Coordination Centre ने खुलासा किया है कि स्कैमर्स प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री जैसे दिग्गज सरकारी अधिकारियों के वीडियो और आवाज को AI के जरिए कॉपी कर रहे हैं। इन नकली वीडियो का इस्तेमाल फर्जी सरकारी योजनाओं का प्रमोशन करने के लिए किया जा रहा है।
कैसे काम करता है यह जाल?
धोखाधड़ी करने वाले Facebook और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपना जरिया बना रहे हैं। यूजर्स को लुभावने ऑफर देकर WhatsApp पर बुलाया जाता है, जहाँ अक्सर +92 जैसे इंटरनेशनल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है। स्कैमर्स रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या टैक्स के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठते हैं।
UPI के जरिए हो रही है लूट
इस फ्रॉड का मुख्य हिस्सा है Unified Payments Interface का दुरुपयोग। जालसाज पीड़ितों को डरा-धमकाकर या झांसे में लेकर 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' (collect request) अप्रूव करवाते हैं या फिर उनका UPI PIN हासिल कर लेते हैं। याद रखें, कोई भी सरकारी स्कीम पैसे जमा कराने के लिए नहीं होती।
क्या करें अगर फंस जाएं?
- सरकारी योजनाओं की जानकारी सिर्फ आधिकारिक वेबसाइटों से ही लें।
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपनी बैंकिंग क्रेडेंशियल्स शेयर करें।
- अगर आपके साथ वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
