गृह मंत्रालय (MHA) ने इंटर-स्टेट काउंसिल के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब राष्ट्रपति शासन के दौरान दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के उपराज्यपाल (LG) इन बैठकों में शामिल हो सकेंगे, ताकि प्रशासनिक काम और प्रोजेक्ट्स में कोई रुकावट न आए।
गृह मंत्रालय ने इंटर-स्टेट काउंसिल के 1990 के पुराने प्रोटोकॉल को अपडेट कर दिया है। इस बदलाव के तहत, जब भी किसी केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होगा, तो वहां के उपराज्यपाल (LG) सीधे तौर पर काउंसिल में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह कदम केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत तालमेल बिठाने के लिए उठाया गया है।
प्रशासन और निवेश में निरंतरता (Administrative Continuity)
बाजार और निवेशकों के लिए किसी भी क्षेत्र में 'पॉलिसी स्टेबिलिटी' सबसे जरूरी होती है। राष्ट्रपति शासन के दौरान अक्सर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। अब LG की भागीदारी सुनिश्चित होने से बजट एलोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
यह फैसला जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद अहम है, जहां केंद्र सरकार बड़े स्तर पर निवेश और विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। इससे उन क्षेत्रों में 'गवर्नेंस वैक्यूम' नहीं बनेगा और काम सुचारू रूप से चलते रहेंगे।
कानूनी स्पष्टता और रेगुलेटरी असर
इस संशोधन को दिल्ली के लिए आर्टिकल 239AB, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73, और पुडुचेरी के लिए सरकारी केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 की धारा 51 से जोड़ा गया है। तकनीकी रूप से स्पष्ट यह बदलाव भविष्य में सरकारी प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी दिलाने और रेगुलेटरी वातावरण को और अधिक प्रेडिक्टेबल बनाने का काम करेगा।
