सरकारी खजाने में बंपर इजाफा!
सरकार के लिए एक अच्छी खबर है! वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' (MCRs) ने बजट के संशोधित अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। यह शानदार प्रदर्शन सरकारी संपत्तियों के मोनेटाइजेशन (monetization) और इक्विटी (equity) की बिक्री से संभव हुआ है। DIPAM (डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, MCRs से कुल संग्रह ₹34,000 करोड़ से अधिक हो गया है।
IRFC और InvITs से मोटी कमाई
इस इजाफे के पीछे दो मुख्य कारण हैं: पहला, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) में सरकार द्वारा अपनी माइनॉरिटी स्टेक (minority stake) की बिक्री, और दूसरा, इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) से हुई जबरदस्त वसूली। इन दोनों से ही सरकार को ₹18,800 करोड़ से ज्यादा का फायदा हुआ है। InvITs, जो इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स से पूंजी जुटाने का एक अहम जरिया बन गए हैं, ने अपनी उपयोगिता साबित की है। वहीं, IRFC जैसे सरकारी उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचकर सरकारें तुरंत राजस्व जुटाने की रणनीति पर काम कर रही हैं, ताकि नियंत्रण खोए बिना मुनाफा कमाया जा सके। यह सब नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) का हिस्सा है, जिसका मकसद ब्राउनफील्ड एसेट्स (brownfield assets) से वैल्यू निकालना है।
एसेट मोनेटाइजेशन पर सरकार का फोकस
अगले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए MCRs का लक्ष्य बहुत महत्वाकांक्षी रखा गया है, जो ₹80,000 करोड़ है। यह FY26 के संशोधित अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा है। इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी अनुराधा ठाकुर ने बताया कि यह लक्ष्य एसेट मोनेटाइजेशन के मजबूत पाइपलाइन पर आधारित है। सरकार अब बड़े रणनीतिक डिसइन्वेस्टमेंट (disinvestment) के बजाय संपत्तियों के लगातार मोनेटाइजेशन पर जोर दे रही है। इसमें सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (CPSE) रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) जैसे रास्ते भी शामिल हैं। सरकार की लिस्टेड CPSEs और वित्तीय संस्थाओं में हिस्सेदारी ₹22 लाख करोड़ और ₹20 लाख करोड़ के पार है, जो मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (Minimum Public Shareholding) नॉर्म्स को पूरा करने और राजस्व बढ़ाने के लिए हिस्सेदारी बिक्री का बड़ा मौका देती है।
IRFC का एनालिटिकल डीप डाइव
IRFC में सरकार की माइनॉरिटी स्टेक सेल (minority stake sale) राजस्व बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। IRFC, जो भारतीय रेलवे को फाइनेंस करती है, उसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹4.60 लाख करोड़ है। FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹6,502 करोड़ रहा। हालांकि, हाल में सरकार द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 4% हिस्सेदारी बेचने के बाद स्टॉक पर दबाव देखा गया। इस OFS का फ्लोर प्राइस (floor price) ₹104 तय किया गया था, जो बाजार भाव से कम था, जिससे शेयर की कीमत में गिरावट आई। कुछ एनालिस्ट्स ने 'स्ट्रॉन्ग सेल' (Strong Sell) रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹60 तक का दिया है।
InvITs और REITs का बढ़ता इकोसिस्टम
एसेट मोनेटाइजेशन का पूरा इकोसिस्टम, जिसमें InvITs और REITs शामिल हैं, तेजी से बढ़ रहा है। InvITs से 2030 तक ₹21 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज करने की उम्मीद है। Q3 FY26 में लिस्टेड InvITs ने ₹5,565 करोड़ का वितरण किया, जिनका कुल AUM ₹7 लाख करोड़ था। CPSE REITs भी सरकारी रियल एस्टेट होल्डिंग्स से वैल्यू निकालने का जरिया बन रहे हैं। सरकार की NMP 2.0 योजना FY26-FY30 के दौरान एसेट मोनेटाइजेशन से ₹16.7 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती है।
बाजार की चिंताएं और भविष्य का रास्ता
मजबूत राजस्व के बावजूद, कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। IRFC के शेयर पर सरकारी हिस्सेदारी बिक्री का असर साफ दिख रहा है। एनालिस्ट्स वैल्यूएशन (valuation) को लेकर चिंतित हैं और भविष्य में और हिस्सेदारी बिकने की आशंका से शेयर पर दबाव देख रहे हैं। कुछ एनालिस्ट्स का 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹60-₹61.2 के आसपास है, जो मौजूदा स्तर से 45% से ज्यादा की गिरावट का संकेत देता है। InvITs और REITs में भी ब्याज दरों का असर और लगातार नए एसेट्स की जरूरत जैसी चुनौतियां हैं।
फिस्कल पोजीशन और आगे का अनुमान
अप्रैल-जनवरी FY26 के लिए सरकार का फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) ₹9.81 ट्रिलियन रहा, जो सालाना लक्ष्य का 63% है। अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹80,000 करोड़ का MCR लक्ष्य और NMP 2.0 का लक्ष्य, सरकार की सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग करके राजस्व जुटाने की स्पष्ट रणनीति को दर्शाता है। एसेट मोनेटाइजेशन पर सरकार का जोर जारी रहेगा, ताकि वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके और इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा मिले।
