FY27 की पहली तिमाही में लार्ज-कैप स्टॉक्स ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया। फॉरेन इन्वेस्टर्स की बिकवाली और धीमी अर्निंग ग्रोथ इसके मुख्य कारण रहे। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि अच्छे वैल्यूएशन और बेहतर अर्निंग बेस के चलते फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में इनकी रिकवरी देखने को मिल सकती है।
Q1 FY27: लार्ज-कैप्स की धीमी शुरुआत
फाइनेंशियल ईयर 2027 की शुरुआत में लार्ज-कैप स्टॉक्स ने मार्केट रिटर्न और अर्निंग परफॉर्मेंस दोनों में ही मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स से पिछड़ गए हैं। इस साल अब तक Nifty 50 इंडेक्स में 7% की गिरावट आई है, जबकि Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स में क्रमशः 5% और 12% का उछाल दर्ज किया गया है। इस बड़े अंतर की मुख्य वजह फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की लगातार बिकवाली रही है, जिसका असर बड़े स्टॉक्स पर ज्यादा पड़ता है।
कमाई और वैल्यूएशन का गणित
जून तिमाही के नतीजों ने इस अंतर को और भी साफ कर दिया। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, लार्ज-कैप कंपनियों ने पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 21% की अर्निंग ग्रोथ दर्ज की। वहीं, मिड-कैप कंपनियों में 23% और स्मॉल-कैप कंपनियों में 31% की ग्रोथ देखी गई।
हालांकि, लार्ज-कैप्स की धीमी ग्रोथ के बावजूद, उनके वैल्यूएशन मेट्रिक्स अब ऐतिहासिक औसत से काफी आकर्षक लग रहे हैं। Nifty 50 फिलहाल अपने 5 साल के ऐतिहासिक औसत 24 के मुकाबले लगभग 20 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है।
इसके विपरीत, मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स काफी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। Nifty Midcap 100 का P/E लगभग 33.7 है, जो इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज के करीब है। वहीं, Nifty Smallcap 100 का P/E लगभग 31 है, जो इसके ऐतिहासिक औसत 27 से ऊपर है। यह वैल्यूएशन गैप बताता है कि मिड और स्मॉल-कैप्स ने रिटेल इन्वेस्टर्स और म्यूचुअल फंड्स से काफी इनफ्लो तो देखा है, लेकिन अब ये हाई एक्सपेक्टेशंस पर ट्रेड कर रहे हैं। ऐसे में, अगर ये छोटी कंपनियां आने वाली तिमाहियों में इन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पातीं, तो इनमें गिरावट का खतरा बढ़ सकता है।
FY27 की दूसरी छमाही का आउटलुक
मार्केट एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में लार्ज-कैप स्टॉक्स में तेजी देखने को मिल सकती है। इस उम्मीद के पीछे कई कारण हैं, जैसे कि देश की इकोनॉमी का मजबूत होना और पिछले साल के मुकाबले बेस इफेक्ट का बेहतर होना। पिछले साल, बड़ी कंपनियों की कमाई पर ग्लोबल फैक्टर, जैसे कि यूएस टैरिफ के मुद्दे, का असर पड़ा था, जिसके अब कम होने की उम्मीद है। साथ ही, मॉनसून पैटर्न के सामान्य होने से इकोनॉमी को भी स्थिरता मिल सकती है।
FY27 की दूसरी छमाही के लिए निवेशकों को FPI फ्लो के ट्रेंड और लार्ज-कैप अर्निंग ग्रोथ में तेजी पर नजर रखनी होगी। जबकि मिड और स्मॉल-कैप्स के प्रीमियम वैल्यूएशन तुरंत गिरावट की गारंटी नहीं देते, वे बड़े मार्केट में हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंतित निवेशकों के लिए एक डिफेन्सिव और आकर्षक विकल्प हो सकते हैं। आखिरी रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि लार्ज-कैप फर्में मजबूत अर्निंग ग्रोथ दिखा पाती हैं या नहीं और जियो-पॉलिटिकल या मैक्रो-इकोनॉमिक वोलेटिलिटी कंट्रोल में रहती है या नहीं।
