L&T के चेयरमैन S. N. Subrahmanyan ने पब्लिक सेक्टर कंपनियों में अधिकारियों का कार्यकाल **5** साल फिक्स करने की वकालत की है। इस खबर के बीच L&T के शेयरों में **1%** का उछाल देखा गया, जिसे कंपनी को मिले बड़े पावर ट्रांसमिशन ऑर्डर्स का भी सपोर्ट मिला है।
Larsen & Toubro (L&T) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर S. N. Subrahmanyan ने सरकारी क्षेत्र में नेतृत्व के बदलावों पर बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने एक इंडस्ट्री कार्यक्रम के दौरान कहा कि अधिकारियों का बार-बार ट्रांसफर, जो अक्सर 1 से 2 साल में होता है, बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी को मुश्किल बनाता है। उनके अनुसार, अगर कार्यकाल को 5 साल के लिए अनिवार्य कर दिया जाए, तो इससे काम में स्थिरता आएगी और प्रोजेक्ट्स की लागत में होने वाली बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी।
सेक्टर के लिए चुनौती और सरकारी निवेश
फिलहाल, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में दक्षता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न मंत्रालयों की मौजूदा परियोजनाओं की लागत शुरुआती अनुमान से करीब ₹2.88 लाख करोड़ ज्यादा पहुंच चुकी है। हालांकि सरकार ने 2026-27 के लिए कैपिटल स्पेंडिंग का बजट बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है, लेकिन चेयरमैन का यह बयान सेक्टर की एक गहरी समस्या की ओर इशारा करता है।
शेयर की चाल और नए ऑर्डर्स
बाजार में L&T का शेयर आज 1% की बढ़त के साथ ₹3,738 के करीब ट्रेड कर रहा है। कंपनी को हाल ही में भारत, सऊदी अरब और UAE में पावर ट्रांसमिशन बिजनेस के लिए ₹10,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ के बीच के 'मेगा' ऑर्डर मिले हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन इनकम FY26 में ₹161,038 करोड़ रहा है और अब पूरा फोकस 'लक्ष्य 2031' (Lakshya 2031) पर है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
मजबूत ऑर्डर बुक के बावजूद, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर नजर रखनी होगी। इसमें सप्लाई चेन की दिक्कतें, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया के भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। कंपनी का मैनेजमेंट इन चुनौतियों को नेविगेट करने पर काम कर रहा है, लेकिन बढ़ते लागत दबाव के बीच मार्जिन (Margins) को बनाए रखना एक मुख्य चुनौती बनी रहेगी।
