लद्दाख प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) के दायरे को पूरे क्षेत्र के सभी **7** जिलों तक बढ़ा दिया है। इस बदलाव से प्लानिंग और एडमिनिस्ट्रेशन के विकेंद्रीकरण (Decentralization) में तेजी आएगी।
गवर्नेंस का विकेंद्रीकरण और रीजनल प्लानिंग
लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना के नेतृत्व में लद्दाख प्रशासन ने 3 सितंबर, 2026 को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह फैसला 13 जुलाई, 2026 को मिले केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद लिया गया है। इस साल अप्रैल में लद्दाख में 5 नए जिले - शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और द्रास बनाए गए थे, और अब इन्हीं समेत सभी जिलों को ऑटोनॉमस काउंसिल का अधिकार मिलेगा।
इससे पहले तक यह व्यवस्था केवल लेह और करगिल तक सीमित थी। 'लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल्स एक्ट, 1997' के तहत ये काउंसिल अब स्थानीय विकास, लैंड यूज और फंड एलोकेशन के मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और सिविल इंजीनियरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अपडेट है, क्योंकि अब टेंडरिंग और प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया अधिक स्थानीय स्तर पर होगी।
प्रशासनिक चुनौतियां और राजनीतिक संदर्भ
फिलहाल प्रशासन बाउंड्री डेलिमिटेशन और इलेक्टोरल रोल्स तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है, ताकि जल्द ही लोकल काउंसिल चुनाव कराए जा सकें। प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने के लिए सरकार ने 17 नए तहसील भी बनाए हैं।
हालांकि, निवेशकों और जानकारों को ध्यान देना चाहिए कि यह एक शुरुआती चरण है। काउंसिल्स की शक्तियां और केंद्रीय प्रशासन के साथ इनका तालमेल बिठाना अभी एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे समूहों के साथ चल रही बातचीत के बीच काउंसिल का विस्तार पॉलिसी के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
