लद्दाख में अब सभी आठ जिलों के पास अपनी ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल होगी। एडमिनिस्ट्रेशन ने 'Hill Development Councils (Amendment) Regulation 2026' लागू कर दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी में तेजी आएगी।
लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 'Ladakh Autonomous Hill Development Councils (Amendment) Regulation, 2026' को नोटिफाई कर दिया है। 16 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद, लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने इस रेगुलेशन को प्रभावी कर दिया है, जिसके तहत अब लद्दाख के सभी आठ जिलों में डेडिकेटेड हिल काउंसिल काम करेंगी।
ग्रासरूट लेवल पर गवर्नेंस का विस्तार
यह कदम क्षेत्रीय प्रशासन को और अधिक विकेंद्रीकृत (decentralized) बनाने की दिशा में एक अहम मोड़ है। शाम, नुब्रा, चांगथांग, जांस्कर और संकू जैसे नए जिलों में काउंसिल बनने से गवर्नेंस लोगों के और करीब आएगी। लद्दाख का अर्थतंत्र मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म और बॉर्डर कनेक्टिविटी पर टिका है, ऐसे में स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका से प्रोजेक्ट्स की निगरानी और फैसलों में तेजी आएगी।
काउंसिल का नया स्ट्रक्चर
रेगुलेशन के मुताबिक, अब काउंसिल की सीटों की संख्या 7 से 24 के बीच होगी, जिसे पहले 26 पर फिक्स किया गया था। यह बदलाव जिलों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। इसके अलावा, समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए काउंसिल में 4 सदस्यों को महिलाओं और अन्य कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों से नामांकित (nominate) करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव
निवेशकों और क्षेत्र पर नजर रखने वाले स्टेकहोल्डर्स के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नई काउंसिलें स्थानीय योजनाओं को कितनी तेजी से एग्जीक्यूट करती हैं। 19 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हुए इस रेगुलेशन के बाद, अब इन काउंसिलों के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। आने वाले समय में, यही काउंसिलें लद्दाख में सरकारी स्कीमों के कार्यान्वयन और डेवलपमेंट फंड के खर्च की रफ्तार तय करेंगी।
