Ladakh Constitutional Talks: केंद्र के साथ बातचीत बेनतीजा, बढ़ी पॉलिसी अनिश्चितता

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Ladakh Constitutional Talks: केंद्र के साथ बातचीत बेनतीजा, बढ़ी पॉलिसी अनिश्चितता

लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। सरकार और स्थानीय नागरिक समाज के बीच लिखित समझौते के अभाव में लद्दाख के प्रशासनिक और विधायी भविष्य पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं।

बिना किसी लिखित समझौते के खत्म हुई बैठक

नई दिल्ली में आयोजित इस अहम बैठक में 'लेह एपेक्स बॉडी' (Leh Apex Body) और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (Kargil Democratic Alliance) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। 3 घंटे तक चली इस मैराथन मीटिंग के बाद भी कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी (legally binding) ढांचा सामने नहीं आया है।

संवैधानिक सुरक्षा की मांग क्यों है अहम?

वर्ष 2019 में लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही यहां के स्थानीय संगठन ज्यादा स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) या अनुच्छेद 371 के तर्ज पर सुरक्षा कवच की है। स्थानीय नेताओं का तर्क है कि इससे न केवल संस्कृति और जमीन के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, बल्कि रोजगार और संसाधनों के प्रबंधन में भी स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

सरकारी रुख और गतिरोध

सरकार ने लद्दाख के लिए एक 'कस्टमाइज्ड सुई जेनेरिस मॉडल' (Customised Sui Generis Model) का प्रस्ताव तो दिया है, लेकिन लिखित दस्तावेज न होने के कारण यह बात चर्चाओं तक ही सीमित रह गई है। गृह मंत्रालय ने मौखिक आश्वासन तो दोहराए, लेकिन प्रदर्शनकारी गुटों को लिखित प्रतिबद्धता नहीं मिली, जो इस पूरे गतिरोध का मुख्य कारण बना हुआ है।

बिजनेस और निवेश पर असर

हिमालयी क्षेत्र में काम कर रहे निवेशकों के लिए इस तरह की राजनीतिक अनिश्चितता एक बड़ा रिस्क है। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, टूरिज्म प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल प्लानिंग के लिए नीतिगत स्थिरता जरूरी होती है। जब तक प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक डेवलपर्स और स्टेकहोल्डर्स सतर्क रुख अपना सकते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताएं भी इस बातचीत को जटिल बना रही हैं। फिलहाल, निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार भविष्य की बैठकों में कोई लिखित फ्रेमवर्क सामने रखेगी या क्षेत्र में फिर से आंदोलन तेज होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.