Kotak Mahindra Mutual Fund की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payments - BoP) वित्तीय वर्ष 2027 तक सरप्लस में आ सकता है। यह अनुमान मजबूत विदेशी निवेश और सुधरती आर्थिक स्थिति पर आधारित है।
भारत के भुगतान संतुलन पर क्या है अनुमान?
Kotak Mahindra Mutual Fund की हालिया रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2027 तक भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payments - BoP) सरप्लस में रहेगा। इसका मतलब है कि देश में आने वाला विदेशी पैसा, देश से बाहर जाने वाले पैसे से अधिक होगा।
इस सकारात्मक आउटलुक के पीछे मजबूत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का बड़ा हाथ है। रिपोर्ट के अनुसार, FY27 की पहली तिमाही में ही $30.7 बिलियन का ग्रॉस एफडीआई आया है, जो पिछले साल की तुलना में एक अच्छी बढ़ोतरी दर्शाता है।
विकास और महंगाई पर नज़र
फंड हाउस ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देता है। वहीं, महंगाई दर (Inflation) के अनुमान को 5% तक नीचे लाया गया है, जो पहले 5.1% था। यह दर्शाता है कि सप्लाई साइड की दिक्कतें कम हो रही हैं।
ब्याज दरों और वैश्विक कारकों का असर
घरेलू स्तर पर ग्रोथ और महंगाई के अच्छे संकेतों के बावजूद, रिपोर्ट यह भी बताती है कि ब्याज दरें शायद वर्तमान स्तरों पर नहीं बनी रहेंगी। अनुमान है कि साल के दूसरे हाफ में 50 बेसिस पॉइंट (0.50%) की ब्याज दर वृद्धि हो सकती है। इसका मुख्य कारण RBI के महंगाई लक्ष्यों को पूरा करना और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित वृद्धि का असर है, जो वैश्विक दरों को प्रभावित करता है।
डेट मार्केट और बॉन्ड यील्ड्स
रिपोर्ट के मुताबिक, 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (Government Bond Yield) अगले मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू तक 6.70% से 6.90% के दायरे में रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) इनफ्लो से मिलने वाली लिक्विडिटी सितंबर 2026 तक शॉर्ट-टर्म यील्ड्स को 15-20 बेसिस पॉइंट तक कम करने में मदद कर सकती है।
निवेशकों के लिए, रिपोर्ट सलाह देती है कि डेट फंड (Debt Fund) का चुनाव अपने निवेश समय-सीमा के अनुसार ही करें। तीन महीने के निवेश के लिए अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म या मनी मार्केट फंड्स पर विचार किया जा सकता है, जबकि 18 महीने या उससे अधिक के लंबे समय के लिए गिल्ट, डायनामिक बॉन्ड या टारगेट मैच्योरिटी फंड्स बेहतर हो सकते हैं। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव सीधे बॉन्ड की कीमतों और डेट फंड्स के रिटर्न को प्रभावित करते हैं।
