Kerala में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच राज्य सरकार अपने वेलफेयर सिस्टम को पूरी तरह बदल रही है। राज्य की लगभग **19%** आबादी अब **60** साल से ऊपर है, जिसे देखते हुए सरकार ने विशेष विभाग और कम्युनिटी-बेस्ड प्रोग्राम्स लॉन्च किए हैं।
डेमोग्राफिक बदलाव की नई हकीकत
Kerala तेजी से भारत की 'जेरियाट्रिक कैपिटल' (Geriatric Capital) बन रहा है। राज्य की लगभग 18.6% आबादी अब 60 वर्ष या उससे अधिक की हो चुकी है, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 10.8% है। कम फर्टिलिटी रेट और लंबी उम्र के कारण राज्य को अब पारंपरिक कल्याणकारी योजनाओं से हटकर विशेष केयर सिस्टम की जरूरत है।
सरकार ने भारत का पहला समर्पित 'एल्डरली वेलफेयर डिपार्टमेंट' और 'सीनियर सिटीजन्स कमीशन' बनाया है। 'एजिंग इन प्लेस' (Aging in Place) मॉडल के तहत 'पकालवीडू' (Pakalveedu) जैसे डे-केयर सेंटर्स और 'टाइम बैंक' जैसी पहल शुरू की गई है, जहाँ वॉलंटियर्स बुजुर्गों की मदद के बदले क्रेडिट कमा सकते हैं।
बजट और आर्थिक असर
निवेशकों और नीति-निर्धारकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। सरकार ने अपने 2026-27 के बजट का 19% हिस्सा बुजुर्गों के कल्याण के लिए आवंटित किया है। राज्य पर पहले से ही कर्ज का बोझ अधिक है, ऐसे में इन वेलफेयर प्रोग्राम्स की स्थिरता एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। राज्य के लिए चुनौती यह है कि वह सामाजिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच कैसे संतुलन बनाता है।
रियल एस्टेट और माइग्रेशन की मार
युवाओं के बड़े पैमाने पर पलायन (करीब 27 लाख लोग बाहर जा चुके हैं) का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखा है। कई इलाकों में रियल एस्टेट मार्केट दबाव में है क्योंकि वहां की प्रॉपर्टीज खाली पड़ी हैं। यह साफ दिखाता है कि डेमोग्राफिक शिफ्ट सीधे तौर पर एसेट वैल्यू को प्रभावित करते हैं।
नए अवसर (Silver Economy)
'सिल्वर इकोनॉमी' की तरफ शिफ्ट होने से हेल्थकेयर, जेरियाट्रिक मॉनिटरिंग, असिस्टिव टेक्नोलॉजी और केयरगिविंग सर्विसेज की मांग में भारी तेजी आने की उम्मीद है। यह निजी क्षेत्र के लिए भी हेल्थकेयर इकोसिस्टम में प्रवेश करने का एक नया मार्केट सेगमेंट खोल रहा है। निवेशकों को आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या सरकार निजी खिलाड़ियों के साथ मिलकर इस मांग को पूरा करने में सक्षम होती है या नहीं।
