केरल के नेता विपक्ष V.D. Satheesan ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन में CAG की ऑडिट कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। उन्होंने जोर दिया कि ऑडिट का ध्यान सरकारी नीतियों के मूल्यांकन के बजाय प्रक्रियात्मक अनुपालन (Procedural Compliance) पर होना चाहिए।
तिरुवनंतपुरम में आयोजित पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) के चेयरपर्सन के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, V.D. Satheesan ने भारत में वित्तीय निगरानी के संवैधानिक दायरों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने तर्क दिया कि CAG का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग कानूनी और प्रक्रियात्मक नियमों के अनुसार हो, न कि सरकार के नीतिगत फैसलों की गुणवत्ता का आकलन करना।\n\n### ऐतिहासिक उदाहरण और विवाद\n\nअपने दावों को पुष्ट करने के लिए उन्होंने दो प्रमुख मामलों का उल्लेख किया:\n\n* 2G स्पेक्ट्रम: उन्होंने ₹1.76 लाख करोड़ के अनुमानित नुकसान के आंकड़े को एक काल्पनिक अनुमान बताया, जो वास्तविक वित्तीय घाटे के बजाय अटकलों पर आधारित था।\n* Vizhinjam पोर्ट: उन्होंने कहा कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप वाली परियोजनाओं पर पारंपरिक सार्वजनिक उपक्रमों के ऑडिट मापदंड लागू करना, कमर्शियल रिस्क शेयरिंग स्ट्रक्चर को नजरअंदाज करना है।\n\n### संसदीय जवाबदेही और पारदर्शिता\n\nSatheesan ने 2021 में Kerala Infrastructure Investment Fund Board (KIIFB) से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट को PAC की जांच से बाहर रखने के कदम की आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विधायिका के पास संवैधानिक रूप से CAG की रिपोर्ट को दबाने का अधिकार नहीं है।\n\nनिवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह चर्चा महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में पारदर्शिता और सुसंगत ऑडिट मानक ही भविष्य के निवेश और नीति-निर्माण की दिशा तय करते हैं।
