केरल सरकार ने इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए 'One State, One Approval' स्कीम यानी SARK की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था का लक्ष्य सरकारी मंजूरी में लगने वाले समय को कम करके राज्य में ₹73,401 करोड़ का निवेश आकर्षित करना है।
केरल सरकार ने अपनी इंडस्ट्रियल पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए 'One State, One Approval, One Document' पहल की शुरुआत की है। नई 'Simplified and Accelerated Regulatory Approvals and Licensing Scheme' (SARK) का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को सरकारी मंजूरी के लिए होने वाली लंबी देरी से राहत दिलाना है। अब तक, राज्य की जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएं बड़े निवेश को आकर्षित करने में एक बड़ी बाधा मानी जाती रही हैं।
टियर-आधारित अप्रूवल स्ट्रक्चर (Tiered Approval Structure)
SARK के तहत निवेश के आकार के हिसाब से अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। ₹25 करोड़ तक के प्रोजेक्ट्स को जिला स्तर पर मंजूरी दी जाएगी ताकि स्थानीय स्तर पर तेजी आए। वहीं, ₹50 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स को सीधे चीफ सेक्रेटरी के ऑफिस से फास्ट-ट्रैक किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया मानकों से समझौता नहीं करेगी, बल्कि विभागों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर एप्लीकेशन को स्वीकार या अस्वीकार करना होगा, जिससे फाइलें दफ्तरों में अटकी न रहें।
निवेश का पाइपलाइन (Investment Pipeline)
राज्य सरकार के पास फिलहाल ₹73,401 करोड़ के संभावित निवेश की एक पाइपलाइन तैयार है। Kerala State Industrial Development Corporation (KSIDC) एक डेटा-संचालित सेल के जरिए लॉजिस्टिक्स, सोलर पावर और बैटरी स्टोरेज जैसे सेक्टर्स में इन प्रोजेक्ट्स को सुगम बना रहा है। राज्य का लक्ष्य अपने बेहतर सामाजिक विकास सूचकांकों का लाभ उठाकर उन चुनौतियों को खत्म करना है जो अब तक ऊंची ऑपरेशनल लागत के कारण बाधा बनी हुई थीं।
रिस्क और चुनौतियां (Implementation Risks)
हालांकि यह पॉलिसी 'Ease of Doing Business' के लिए बड़ा कदम है, लेकिन निवेशक अभी भी जमीन अधिग्रहण और स्थानीय विरोध जैसी पुरानी समस्याओं को लेकर सतर्क हैं। इसके अलावा, कोर्ट के कुछ पुराने आदेश और पर्यावरण संबंधी नियम भी राह में रोड़ा बन सकते हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या सरकार वास्तव में अपने विभागों को इन सख्त डेडलाइन्स के साथ काम करने के लिए मजबूर कर पाएगी।
