केरल सरकार बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी में है, जो उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा। यह पहल पारंपरिक वेलफेयर से हटकर एक अधिकार-आधारित ढांचा तैयार करने के लिए है, हालांकि राज्य का बढ़ता कर्ज इस योजना के वित्तीय भविष्य पर सवाल उठा रहा है।
इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्सन्स के मौके पर केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बुजुर्गों के लिए कानूनी गारंटी देने वाला एक नया कानून लाने का ऐलान किया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में बुजुर्गों के सपोर्ट सिस्टम को सरकारी मदद से बदलकर सीधे 'कानूनी अधिकार' (Legal Rights) में तब्दील करना है।
नई पहल और 'सिल्वर इकॉनमी'
सरकार का प्लान है कि बुजुर्गों की विशेष जरूरतों को समझने के लिए एक स्टेट-लेवल रजिस्ट्री बनाई जाए। इसके तहत केयरगिविंग को प्रोफेशनल बनाया जाएगा और इसके लिए स्पेशल सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए जाएंगे। केरल में बढ़ती उम्र के लोगों की आबादी को देखते हुए इसे 'सिल्वर इकॉनमी' के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है, जो हेल्थकेयर और सोशल पार्टिसिपेशन पर केंद्रित होगी। यह पहल 'Kerala State Elderly Commission Bill 2025' के प्रयासों को आगे बढ़ाती है।
आर्थिक चुनौतियां और बजट का दबाव
इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की खस्ताहाल माली हालत है। केरल का कुल पब्लिक डेट (Public Debt) पहले ही ₹5 लाख करोड़ के पार निकल चुका है। राज्य पहले से ही वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे भारी खर्चों के दबाव में है।
एक्सपर्ट्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार बजट में बिना राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) तोड़े इसके लिए फंड कैसे जुटाएगी? अब देखना यह होगा कि विधानसभा में पेश होने वाले ड्राफ्ट और आगामी बजट सेशन में इस स्कीम के लिए कितना एलोकेशन तय किया जाता है।
