साल 2025 में केरल में **878,863** नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) ने **12.1%** मार्केट शेयर हासिल कर लिया है। हालांकि, वाहनों की बढ़ती कुल संख्या इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबिलिटी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
केरल में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का सफर 2025 में एक बड़े मुकाम पर पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 878,863 नए वाहनों का पंजीकरण हुआ, जिनमें से 12.1% इलेक्ट्रिक मॉडल हैं। इलेक्ट्रिक स्कूटर और थ्री-व्हीलर्स के प्रति लोगों का रुझान तो साफ दिख रहा है, लेकिन सड़कों पर कुल वाहनों की तादाद में जिस तेजी से इजाफा हो रहा है, वह भविष्य के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
इन्वेस्टर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक इंजन लाना ही समाधान नहीं है। सड़कों पर वाहनों का घनत्व (Vehicle Density) बढ़ने से ट्रैफिक, पार्किंग और प्रदूषण जैसी समस्याएं बरकरार हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते वॉल्यूम के सामने पर्यावरण से मिलने वाले फायदे कम पड़ सकते हैं, क्योंकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ रही है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सरकारी रणनीति
राज्य की भविष्य की मोबिलिटी रणनीति अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर टिक सकती है। इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों के लिए ज्यादा प्रभावी विकल्प हो सकती हैं, जिससे कंजेशन और प्रति व्यक्ति उत्सर्जन में कमी आ सकती है। हालांकि, ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए यह बदलाव काफी महंगा साबित हो रहा है। चार्जिंग डिपो, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस फैसिलिटी पर होने वाला भारी खर्च शॉर्ट टर्म में कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकता है।
पावर ग्रिड पर दबाव
एक और अहम पहलू 'पावर ग्रिड कैपेसिटी' है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी, बिजली वितरण नेटवर्क पर लोड बढ़ेगा। नीति निर्माताओं के सामने चुनौती यह है कि वे ट्रांसपोर्ट की ऊर्जा जरूरतों और रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। आने वाले समय में स्मार्ट चार्जिंग और ग्रिड अपग्रेड जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश सेक्टर की दिशा तय करेंगे।
