Arvind Kejriwal ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar की गिरफ्तारी की मांग की है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग के कामकाज में संवैधानिक प्रोटोकॉल की अनदेखी की जा रही है, जो बाजार और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ा चिंता का विषय हो सकता है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। Kejriwal का आरोप है कि चुनाव आयोग (ECI) में संवैधानिक नियमों को ताक पर रखकर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं, जबकि आयोग एक तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है।
आरोपों का केंद्र: संस्थागत गतिरोध
Kejriwal का दावा है कि पिछले 10 महीनों में अन्य दो चुनाव आयुक्तों, Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने कम से कम 14 बार फैसलों पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुख्य विवाद 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' और IT मॉड्यूल्स से जुड़े निर्देशों को लेकर है, जिन्हें कथित तौर पर बिना सामूहिक सहमति के लागू किया गया।
क्या है मार्केट पर असर?
निवेशकों की नजर में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्थिरता का सीधा संबंध देश के आर्थिक माहौल से होता है। एक पारदर्शी और सर्वसम्मत प्रशासनिक ढांचा विदेशी निवेश (FDI) और लंबी अवधि की आर्थिक योजनाओं के लिए जरूरी है। अगर किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था के भीतर इस तरह का विवाद लंबे समय तक चलता है, तो यह बाजार में अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
AAP की अगली मांग
विवाद को आगे बढ़ाते हुए AAP ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में हाल ही में हुए चुनावों को रद्द करने की मांग भी की है। फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ECI या कानूनी अधिकारियों का रुख ही यह तय करेगा कि यह विवाद केवल एक प्रशासनिक मतभेद है या देश की स्थिरता के लिए कोई बड़ा रिस्क।
