बेंगलुरु पर बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर के दबाव को कम करने के लिए कर्नाटक सरकार ने 'Beyond Bengaluru' पहल को तेज कर दिया है। अब मैसूर और हुबली-धारवाड़ जैसे शहरों में इंडस्ट्रियल और टेक विकास पर सरकार का पूरा फोकस है।
इंडस्ट्रियल क्लस्टर की नई रणनीति
कर्नाटक सरकार अब राज्य के आर्थिक विकास को विकेंद्रीकृत (decentralize) करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल बेंगलुरु तक सीमित न रहकर मैसूर, मंगलुरु और हुबली-धारवाड़ जैसे शहरों को भी औद्योगिक केंद्र बनाना है। इस नई नीति के तहत, Karnataka Digital Economy Mission मैसूर को आईटी सेक्टर के लिए एक सेकेंडरी हब के रूप में विकसित कर रहा है। वहीं, हाल ही में मंजूर की गई Aerospace Policy 2026-31 हुबली-धारवाड़ और बेलगावी कॉरिडोर में एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी।
कमिटमेंट्स और हकीकत का अंतर
बेंगलुरु के बाहर बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट्स को मंजूरी तो मिली है, लेकिन असली चुनौती इनके एग्जीक्यूशन (execution) की है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश के वादों और जमीन पर काम शुरू होने के बीच अक्सर एक बड़ा गैप होता है। सरकार ने इसे पाटने के लिए 'Udyoga Sethu' जैसे प्लेटफॉर्म बनाए हैं, जो जॉब सीकर्स को प्राइवेट एम्प्लॉयर्स से जोड़ते हैं। इसके अलावा, इन्वेस्टमेंट आकर्षित करने के लिए क्लस्टर सीड फंड की भी शुरुआत की गई है। हालांकि, इन पहलों की सफलता बिजली, पानी और ट्रांसपोर्ट जैसे बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही टिकी है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
भले ही सरकार टियर-2 शहरों पर जोर दे रही है, लेकिन बेंगलुरु अभी भी राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बना हुआ है, जहाँ मेट्रो और सड़क परियोजनाओं के लिए भारी पब्लिक कैपिटल खर्च किया जा रहा है। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि कितनी तेजी से ये प्रोजेक्ट्स प्लानिंग स्टेज से ऑपरेशनल स्टेटस तक पहुंचते हैं। आने वाले समय में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की प्रगति ही यह तय करेगी कि कंपनियां बेंगलुरु के बाहर अपने पैर जमाने में कितनी सफल होती हैं।
