कर्नाटक सरकार ने अपनी **5** साल की मरीन बायोटेक पॉलिसी लॉन्च की है, जिसका लक्ष्य राज्य की ब्लू बायो-इकॉनमी को **$2 बिलियन** से बढ़ाकर **$8 बिलियन** तक ले जाना है।
नई पॉलिसी और विजन
कर्नाटक सरकार ने मरीन बायोटेक पॉलिसी 2026-2031 को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की तटीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देना है। इसके लिए ₹120 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जो फार्मास्यूटिकल्स और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन को बढ़ावा देगा।
प्रमुख संस्था और इंसेंटिव्स
इस प्लान के तहत Karnataka Institute of Marine Biotechnology and Blue Economy की स्थापना की जाएगी। सरकार सीवीड (seaweed) वैल्यू एडिशन के लिए Production Linked Incentive (PLI) स्कीम और ब्लू कार्बन सर्टिफिकेशन प्रोग्राम भी शुरू करेगी, ताकि प्राइवेट कंपनियां अधिक वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट बना सकें। मंगलुरु स्थित फिशरीज कॉलेज में भी सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 200 करने की योजना है ताकि इंडस्ट्री को स्किल्ड टैलेंट मिल सके।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को इस सेक्टर में उतरने से पहले कुछ चुनौतियों पर नजर रखनी होगी:
- CRZ (Coastal Regulation Zone) नियम: तटीय इलाकों में निर्माण और इंडस्ट्रियल गतिविधियों पर सख्त नियम हैं, जिनसे गुजरना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: भारत का सीवीड उद्योग अभी शुरुआती दौर में है। सप्लाई चेन और लार्ज-स्केल फार्मिंग की दक्षता साबित करना कंपनियों के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
आने वाले समय में निवेशकों को PLI स्कीम की गाइडलाइन्स और बायोटेक जोन्स के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
