Karnataka Drought: सूखे की मार से बेहाल कर्नाटक, केंद्र से मांगी तत्काल आर्थिक मदद

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Karnataka Drought: सूखे की मार से बेहाल कर्नाटक, केंद्र से मांगी तत्काल आर्थिक मदद

कर्नाटक में **177** तालुकों में सूखे के गंभीर संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से अंतरिम राहत फंड की मांग की है। राज्य के **40 लाख** हेक्टेयर में फसलें खतरे में हैं और जल स्तर गिरने से कृषि और पेयजल का संकट गहरा गया है।

कर्नाटक सरकार ने केंद्र से फौरन अंतरिम सूखा राहत फंड जारी करने की औपचारिक अपील की है। डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने बताया कि 2026 के साउथवेस्ट मानसून में भारी बारिश की कमी के कारण यह आपात स्थिति पैदा हुई है। फिलहाल 177 तालुक सूखे की चपेट में हैं और अनुमान है कि यह संख्या जल्द ही 200 के पार जा सकती है।

कृषि और जल सुरक्षा पर बड़ा असर

सूखे के कारण राज्य की इकोनॉमी के मुख्य स्तंभ यानी कृषि पर भारी संकट मंडरा रहा है। लगभग 40 लाख हेक्टेयर में फसल के नुकसान का खतरा है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में फूड इन्फ्लेशन पर पड़ सकता है। कावेरी बेसिन में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पानी की किल्लत और हाइड्रोपावर जनरेशन पर भी खतरा बढ़ गया है।

राहत की उम्मीद और वित्तीय दबाव

आमतौर पर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फंड (NDRF) से पैसा मिलने में लंबी प्रक्रिया होती है, लेकिन राज्य सरकार ने तत्काल लिक्विडिटी के लिए राहत मेमोरेंडम का 50% हिस्सा तुरंत जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (SDRF) की दूसरी किस्त भी जल्दी जारी करने का आग्रह किया गया है ताकि किसानों को सब्सिडी और पीने के पानी की व्यवस्था की जा सके।

निवेशकों के लिए संकेत

बाजार के जानकारों और निवेशकों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने वाली है। ग्रामीण इलाकों में खरीद क्षमता घटने से FMCG, ट्रैक्टर और रूरल फाइनेंस सेक्टर पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, अगर सूखा लंबा खिंचता है, तो अनाज और कमोडिटी की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जो सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ा सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.