कर्नाटक की नई ग्रामीण रोजगार योजना में जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच **2.04 करोड़** पर्सन-डेज का काम हुआ है, जो पिछले साल के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। हालांकि, भागीदारी बढ़ने के बावजूद फंडिंग रेशियो में बदलाव और वेतन भुगतान में देरी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कर्नाटक में ग्रामीण रोजगार सृजन ने एक बड़ी छलांग लगाई है। राज्य ने नई 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन' (VB-G RAM G) के तहत 2.04 करोड़ पर्सन-डेज दर्ज किए हैं। 1 जुलाई 2026 को MGNREGA की जगह लेने वाली यह नई योजना अकुशल और भूमिहीन मजदूरों के लिए मुख्य सहारा बनी है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.71 करोड़ पर्सन-डेज था।
नई योजना की खासियतें
इस कार्यक्रम में सालाना गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जिसमें प्रति दिन ₹382 की समान मजदूरी तय की गई है। रायचूर, बीदर और कोप्पल जैसे जिलों ने जल निकायों की सफाई और सामुदायिक बुनियादी ढांचे जैसे कार्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियां
योजना में बदलाव के बाद सरकार पर भारी वित्तीय दबाव बना है। केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग रेशियो अब 60:40 हो गया है, जबकि पहले यह 90:10 था। राज्य सरकार पर अब पहले से कहीं ज्यादा फंड का बोझ है।
इसके अलावा, 311 ग्राम पंचायतों में वेतन भुगतान में देरी की खबरें सामने आई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने 308 पंचायत विकास अधिकारियों (PDOs) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने और बढ़ते खर्चों के बीच योजना को निरंतर बनाए रखने की है।
