कानूनी विवादों के बीच कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से पानी का बहाव बढ़ाकर **11,547 क्यूसेक** कर दिया है, जो तय सीमा **9,000 क्यूसेक** से अधिक है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई **15 सितंबर** के लिए टाल दी है।
पानी का बढ़ा हुआ फ्लो
कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी के निर्देशों का पालन करते हुए कर्नाटक सरकार ने 31 अगस्त, 2026 तक नदी के बहाव में बढ़ोतरी की है। सुबह 8:00 बजे तक पानी का डिस्चार्ज 11,547 क्यूसेक दर्ज किया गया। यह फैसला हाइड्रोलॉजिकल अनिश्चितता के बीच दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को सुव्यवस्थित करने के लिए लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को 15 सितंबर तक के लिए टालते हुए साफ कर दिया है कि पानी की पर्याप्तता से जुड़ी शिकायतों के लिए कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी और कावेरी वाटर रेगुलेशन कमेटी के पास जाना होगा। कोर्ट ने अब ऑपरेशनल जिम्मेदारी सीधे इन वैधानिक संस्थाओं पर डाल दी है।
तमिलनाडु की मांग और आर्थिक प्रभाव
बहाव में बढ़ोतरी के बावजूद तमिलनाडु का तर्क है कि यह पानी उनके घाटे को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। तमिलनाडु का कहना है कि कमी के कारण कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, 27 अगस्त को कर्नाटक द्वारा कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।
निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि पानी की कमी का असर सप्लाई चेन और रीजनल लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है। आने वाली 15 सितंबर की सुनवाई पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि किसी भी तरह का विवाद लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों को बाधित कर सकता है।
