कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु में ExxonMobil के साथ अपने रिश्तों को और गहरा करने की पहल की है। वहीं, राज्य सरकार ने **₹29,679 करोड़** के नए औद्योगिक निवेश को मंजूरी दी है, जिससे करीब **66,000** से ज्यादा नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
कर्नाटक सरकार बेंगलुरु को ग्लोबल रिसर्च और टेक्नोलॉजी हब के रूप में और मजबूत करने के लिए ExxonMobil के साथ मिलकर काम कर रही है। राज्य के होम मिनिस्टर प्रियांक खड़गे ने हाल ही में ExxonMobil इंडिया के कंट्री चेयर स्कॉट सैंडलिन के साथ बैठक की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र ज्वाइंट इनोवेशन, स्किल्स ट्रेनिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना था।
बढ़ता हुआ फुटप्रिंट
ExxonMobil पिछले 3 दशक से बेंगलुरु में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के जरिए काम कर रही है। हाल ही में कंपनी ने इंटरनेशनल टेक पार्क बेंगलुरु में 235,300 स्क्वायर फीट की नई ऑफिस स्पेस भी ली है, जो भारत में काम करने के तरीके में बदलाव को दर्शाता है—अब कंपनियां यहाँ केवल एडमिन सपोर्ट नहीं, बल्कि हाई-एंड डेटा और कॉर्पोरेट ऑपरेशन पर फोकस कर रही हैं।
₹29,679 करोड़ का बड़ा निवेश
राज्य की 68वीं स्टेट हाई लेवल क्लीयरेंस कमेटी की बैठक में औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भारी फंड को हरी झंडी दी गई है। इसमें कुछ प्रमुख नाम शामिल हैं:
- Mahindra Aerostructures: कोलार में ₹2,300 करोड़ से एयरोस्पेस फैसिलिटी बनाएगी।
- Aequs Consumer Products: धारवाड़ में ₹1,104 करोड़ का निवेश करेगी।
- Toyota Kirloskar Motor: ₹1,200 करोड़ से बिजनेस इंटेलिजेंस हब तैयार करेगी।
- Vibrancy Real Estates: IT और ITES के लिए ₹2,195 करोड़ खर्च करेगी।
इनवेस्टर्स के लिए क्या है रिस्क?
इतने बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स आना अच्छी खबर है, लेकिन इनकी सफलता जमीन पर समय से कंस्ट्रक्शन पूरा होने और स्किल्ड लेबर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। साथ ही, ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में क्रूड ऑयल की कीमतों और जियो-पॉलिटिकल हालातों का असर सीधे तौर पर ऐसी दिग्गज कंपनियों के फैसलों पर पड़ता है। निवेशकों के लिए इन प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस को ट्रैक करना काफी अहम होगा क्योंकि यही राज्य के मैन्युफैक्चरिंग भविष्य की दिशा तय करेंगे।
