कर्नाटक सरकार ने ग्लोबल मार्केट में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए अमेरिका, जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में निवेश प्रोत्साहन कार्यालय खोलने का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य लक्ष्य सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे हाई-टेक सेक्टर में विदेशी निवेश आकर्षित करना है।
कर्नाटक सरकार अब अपनी इकोनॉमिक पहुंच का दायरा बढ़ाने जा रही है। Invest Karnataka Forum (IKF) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इन प्रमुख ग्लोबल मार्केट्स में फिजिकल ऑफिस खोलने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का मकसद सिर्फ निवेश की उम्मीद करना नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ FDI को कर्नाटक लाने का है।
क्या है सरकार का मास्टर प्लान?
राज्य के उद्योग मंत्री M. B. Patil ने इन विदेशी आउटपोस्ट के लिए व्यवहार्यता मूल्यांकन (Feasibility Assessment) शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में कर्नाटक को ग्लोबल मैप पर नंबर-1 बनाना। इसके लिए हर देश में 'कंट्री लीड्स' नियुक्त किए जाएंगे, जो जमीन पर निवेश के अवसरों को हकीकत में बदलने का काम करेंगे।
क्यों अहम है यह कदम?
राज्य ने हाल ही में 'ग्लोबल इन्वेस्टमेंट एंड ओवरसीज अफेयर्स' नाम से एक नया विभाग भी बनाया है, जो विदेशी डेलिगेशन के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम के तौर पर काम करेगा। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि IKF कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, बल्कि एक सरकारी इकाई है। इसलिए, निवेशकों को इसे किसी शेयर की तेजी से नहीं, बल्कि राज्य के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम में आ रहे बड़े बदलाव के तौर पर देखना चाहिए।
असली चुनौती क्या है?
भले ही यह कदम रणनीतिक रूप से मजबूत है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या सरकार इन ऑफिसों के जरिए सिर्फ कागजी MOU साइन करवाएगी या फिर वाकई में बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को कर्नाटक में ला पाएगी। भारत के अन्य राज्यों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, इन दफ्तरों का बजट मैनेजमेंट और ऑपरेशनल परफॉरमेंस आने वाले समय में एक बड़ा 'मॉनिटरेबल फैक्टर' होगा।
