कर्नाटक कैबिनेट मंत्री B. Nagendra ने Maharshi Valmiki Scheduled Tribes Development Corporation से जुड़े कथित फंड डायवर्जन मामले में अपने पद और MLA पद से इस्तीफा दे दिया है। **₹89.63 करोड़** के इस विवाद ने राज्य में भारी राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को B. Nagendra ने अपने मंत्री पद और विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम विपक्षी दलों, खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (Secular) द्वारा राज्य सरकार पर बनाए गए भारी दबाव के बाद उठाया गया है। यह विवाद एक सरकारी संस्थान में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह इस्तीफा इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में B. Nagendra को फिर से कैबिनेट में शामिल किया गया था। जून 2024 में जब पहली बार ₹89.63 करोड़ के फंड डायवर्जन का मामला सामने आया था, तब भी उन्होंने पद छोड़ा था। इसके बाद 3 अगस्त 2026 को उन्हें योजना और सांख्यिकी मंत्री के रूप में दोबारा कैबिनेट में जगह मिली, जिसने विपक्ष को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
जांच का दायरा
हालांकि मंत्री ने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है, लेकिन मामले ने सरकारी संस्थाओं के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में तेजी तब आई जब कॉर्पोरेशन के अकाउंट्स सुपरिटेंडेंट P. Chandrasekharan की मौत के बाद उनके नोट्स से अनधिकृत फाइनेंशियल ट्रांसफर का पता चला। अब इस पूरे मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) के दायरे में है।
बाजार और गवर्नेंस पर असर
निवेशकों के नजरिए से देखें तो ऐसी राजनीतिक अस्थिरता का असर सरकारी नीतियों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है। जब सरकार का पूरा ध्यान राजनीतिक विवादों को संभालने में लग जाता है, तो फैसलों की रफ्तार धीमी हो जाती है। राज्य में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सरकारी फंड की सुरक्षा को लेकर उठे ये सवाल आने वाले समय में राज्य की निवेश रैंकिंग और प्रशासनिक स्थिरता के लिए एक 'मॉनिटरेबल' फैक्टर बने रहेंगे।
