कर्नाटक सरकार ने राज्य के **170** से अधिक तालुकों में बारिश की कमी को दूर करने के लिए **60** दिनों का क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस **₹28.52 करोड़** के मिशन के लिए सरकार ने सीधे कॉन्ट्रैक्ट देने का फैसला किया है, जिस पर सवाल भी उठ रहे हैं।
मिशन की रणनीति और निगरानी
इस 60 दिवसीय प्रोजेक्ट की कमान Karnataka Neeravari Nigam Limited (KNNL) और Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre (KSNDMC) के हाथों में है। पिछली बार की तुलना में इस बार की रणनीति अलग है; अब विमानों को हर 2 घंटे में मिलने वाले रीयल-टाइम डेटा के आधार पर भेजा जाएगा। तकनीकी फैसलों और परिणाम की समीक्षा के लिए दो विशेष कमेटियों का गठन भी किया गया है।
कॉन्ट्रैक्ट पर विवाद और पारदर्शिता
इस प्रोजेक्ट का ठेका Kyathi Climate Modification Consultants LLP को दिया गया है। विवाद की मुख्य वजह यह है कि सरकार ने इस डील को Karnataka Transparency in Public Procurements (KTPP) एक्ट से छूट दे दी है। बिडिंग प्रोसेस को पूरी तरह दरकिनार कर सीधा कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सफलता पर संशय
क्लाउड सीडिंग की सफलता को लेकर विशेषज्ञों की अपनी चिंताएं हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान वायुमंडलीय स्थितियों में नमी की कमी हो सकती है, जो इस प्रोजेक्ट के असर को सीमित कर सकती है। साथ ही, पुराने आंकड़ों के मुताबिक ऐसी तकनीक की सफलता दर केवल 35% के आसपास रही है। ऐसे में राज्य के वाटर रिसोर्सेज को फिर से भरने का यह मिशन कितना सफल होगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में मौसम के मिजाज पर ही निर्भर करेगा।
