Karnataka Gig Worker Scheme: सरकारी स्कीम में भारी सुस्ती, Zomato-Swiggy की कानूनी लड़ाई का असर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Karnataka Gig Worker Scheme: सरकारी स्कीम में भारी सुस्ती, Zomato-Swiggy की कानूनी लड़ाई का असर

कर्नाटक सरकार की गिग वर्कर्स इंश्योरेंस स्कीम को उम्मीद के मुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। **2.30 लाख** के टारगेट के मुकाबले सिर्फ **30,256** वर्कर्स ही रजिस्टर हो पाए हैं, क्योंकि Zomato और Swiggy जैसी कंपनियां अनिवार्य वेलफेयर फीस को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

कर्नाटक सरकार की ओर से गिग वर्कर्स के लिए शुरू की गई सोशल सिक्योरिटी पहल अभी काफी धीमी रफ्तार से चल रही है। लेबर डिपार्टमेंट के डेटा के मुताबिक, जो इंश्योरेंस प्रोग्राम साल 2023 के अंत में लॉन्च हुआ था, उसमें अब तक सिर्फ 30,256 वर्कर्स ही जुड़े हैं। यह सरकारी टारगेट 2,30,000 के मुकाबले काफी कम है, जबकि राज्य में अनुमानित वर्कर्स की संख्या करीब 3 लाख है।

इंश्योरेंस और भागीदारी का अंतर

इस स्कीम में वर्कर्स को ₹4 लाख तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है, जिसमें लाइफ, एक्सीडेंट, परमानेंट डिसेबिलिटी और हॉस्पिटल के खर्च शामिल हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया स्वैच्छिक है और इसमें तेजी नहीं आ रही है। लेबर डिपार्टमेंट का मानना है कि कई प्रमुख डिलीवरी एग्रीगेटर्स की ओर से सक्रिय सहयोग न मिलने के कारण भी भागीदारी कम है।

वेलफेयर फीस पर कानूनी घमासान

यह पूरा मामला 'कर्नाटक प्लेटफॉर्म-बेस्ड गिग वर्कर्स एक्ट' से जुड़ा है, जो मई 2025 में लागू हुआ। कानून के तहत कंपनियों को वेलफेयर फंड में योगदान देना है। हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने से तो मना कर दिया है, लेकिन कई बड़े प्लेटफॉर्म्स ने इसे अदालत में चुनौती दी है।

नतीजतन, Zomato, Swiggy, Blinkit और Zepto जैसी बड़ी कंपनियां अभी अपना वेलफेयर फंड सीधे राज्य को देने के बजाय कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर रही हैं। वहीं, Yulu Bikes और Namma Yatri जैसे छोटे ऑपरेटरों ने इसे सीधे सरकार को जमा करना चुना है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों के लिए यह स्थिति गिग इकोनॉमी में बड़े रेगुलेटरी रिस्क की ओर इशारा करती है। चिंता केवल फीस की नहीं, बल्कि बढ़ते ऑपरेशनल और कंप्लायंस खर्च की है। अगर यह मॉडल अन्य राज्यों में भी लागू होता है, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें अब कर्नाटक हाई कोर्ट के फाइनल फैसले और वेलफेयर फीस के स्ट्रक्चर पर टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.