कर्नाटक सरकार के लिए खुशखबरी है! चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में राज्य का आबकारी राजस्व **₹22,191.63 करोड़** पहुंच गया है, जो **13.39%** की बढ़त है। इसकी मुख्य वजह नई AIB टैक्स पॉलिसी और बीयर की मांग में आया **41.32%** का बड़ा उछाल है।
कर्नाटक के आबकारी विभाग के लिए चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2026) बेहद सफल रही है। नई 'अल्कोहल-इन-बेवरेज' (AIB) टैक्स पॉलिसी के लागू होने के बाद राजस्व में 13.39% की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है।
टैक्स रिफॉर्म्स का असर
सरकार ने 11 मई 2026 से टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव किए थे। पहले जहां 16 प्राइस स्लैब होते थे, उन्हें घटाकर अब केवल 8 कर दिया गया है। इसका मकसद टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना और जटिलताओं को खत्म करना था। सरकार ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹45,000 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट रखा है और शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि राज्य इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
ग्राहकों की पसंद में बदलाव
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जहां एक ओर इंडियन-मेड लिकर (IML) में वॉल्यूम ग्रोथ केवल 1.14% रही, वहीं बीयर की बिक्री में 41.32% का भारी उछाल आया। बीयर की बिक्री 195.27 लाख केस से बढ़कर 275.96 लाख केस तक पहुंच गई है। साफ है कि नई टैक्स पॉलिसी ने ग्राहकों को कम अल्कोहल वाली ड्रिंक्स की ओर आकर्षित किया है।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि यह शुरुआत अच्छी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में रिटेल कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ी चुनौती हो सकता है। कंपनियों पर इनपुट कॉस्ट का दबाव बढ़ने से क्या वे ग्राहकों पर बोझ डालेंगी? यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, निवेशकों की नजरें लिकर कंपनियों के अगले कमेंट्री और मासिक कलेक्शन डेटा पर टिकी हैं, ताकि यह पता चल सके कि क्या यह रफ्तार पूरे साल कायम रहेगी।
