कर्नाटक भीषण सूखे की चपेट में है, जिससे राज्य के 101 तालुक प्रभावित हुए हैं। कृषि क्षेत्र को करीब ₹18,000 करोड़ का नुकसान हुआ है, वहीं बिजली की मांग 19,000 MW के पार जाने से राज्य सरकार ₹13 प्रति यूनिट तक महंगी बिजली खरीदने को मजबूर है।
कर्नाटक एक गहरे सूखे के संकट से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की खेती और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ रहा है। अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। पानी की भारी कमी के कारण 20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर बुवाई नहीं हो पाई है, जिससे अनुमानित तौर पर कृषि क्षेत्र को ₹18,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।\n\nवहीं, एनर्जी सेक्टर भी दबाव में है। बिजली की मांग 19,000 MW के आंकड़े को पार कर गई है। इस मांग को पूरा करने के लिए स्टेट यूटिलिटी को ओपन मार्केट से ₹11 से ₹13 प्रति यूनिट की महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है, जो सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ डाल रही है। साथ ही, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को ली गई बिजली वापस करने की मजबूरी ने लोकल सप्लाई को और भी सीमित कर दिया है।\n\nसरकार अब इस संकट से निपटने के लिए थर्मल पावर जनरेशन बढ़ाने और 'वन नेशन, वन ग्रिड' का उपयोग करने पर विचार कर रही है ताकि ब्लैकआउट की स्थिति से बचा जा सके। हालांकि, ग्रिड के जरिए महंगी बिजली आयात करने से ट्रांसमिशन कॉस्ट में बढ़ोतरी होगी, जो भविष्य में राज्य के बजट के लिए चुनौती बन सकती है।\n\nकिसानों की परेशानी और बिजली संकट का समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार ने 21 सितंबर से 23 सितंबर, 2026 तक विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया है। निवेशकों और बिजनेस स्टेकहोल्डर्स को अब राज्य की वित्तीय स्थिति और बिजली की उपलब्धता पर नजर बनाए रखनी होगी।
