Karnataka सरकार ने राज्य के 226 सूखाग्रस्त तालुकों के किसानों के खाते में **₹2,500** की पहली किश्त ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन राज्य के खजाने पर इसका भारी असर पड़ रहा है।
राहत का पहला चरण और चुनौतियां
राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए यह पहल शुरू की है। यह राहत दो किश्तों में दी जा रही है, जिसमें से पहली किश्त का वितरण शुरू हो चुका है और दूसरी किश्त भी जल्द जारी की जाएगी। फिलहाल, 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार अभी अपने संसाधनों से ही यह खर्च उठा रही है, जबकि केंद्र सरकार से ₹22,400 करोड़ की सहायता राशि की मांग की गई है। कुल अनुमानित आर्थिक नुकसान ₹62,000 करोड़ से अधिक आंका गया है।
बिजली बिल और फिस्कल प्रेशर
सूखे के कारण जलाशयों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे ग्राउंड वॉटर निकालने के लिए बिजली की मांग बढ़ गई है। इसके चलते राज्य का बिजली खर्च ₹20,000 करोड़ से बढ़कर ₹30,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इस अतिरिक्त खर्च से राज्य सरकार की अन्य कैपिटल परियोजनाओं के लिए फंड की उपलब्धता सीमित हो सकती है।
बाजार पर असर और इन्वेस्टर्स के लिए संकेत
ग्रामीण मांग पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। कंज्यूमर गुड्स, टू-व्हीलर्स, ट्रैक्टर और फर्टिलाइजर सेक्टर पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेटा पॉइंट है। ग्रामीण आय में कमी से इन क्षेत्रों की सेल्स पर दबाव बन सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार से फंड कब तक जारी होता है, क्योंकि देरी होने पर इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग पर भी असर पड़ सकता है।
