कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने प्रस्तावित **67.16 TMC** वाले Mekedatu जलाशय प्रोजेक्ट को तमिलनाडु के हित में बताया है। हालांकि बेंगलुरु की पानी की जरूरतों को पूरा करने की इस कोशिश का पड़ोसी राज्य कड़ा विरोध कर रहा है, जिससे यह मामला कानूनी विवादों में फंसा हुआ है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने एक बार फिर Mekedatu बैलेंसिंग रिजर्वोयर प्रोजेक्ट का बचाव किया है। 26 अगस्त 2026 को दिए बयान में उन्होंने कहा कि इस बांध में जमा 5 TMC पानी बेंगलुरु की प्यास बुझाने के लिए है, जबकि बाकी पानी तमिलनाडु और पुडुचेरी की ओर छोड़ा जाएगा। सीएम का तर्क है कि इससे मानसून का वह पानी बर्बाद होने से बचेगा जो फिलहाल समुद्र में चला जाता है।
प्रोजेक्ट की बड़ी खूबियां
यह एक महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसमें 67.16 TMC क्षमता का जलाशय और 400 MW का हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट बनाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इससे कावेरी नदी के जल प्रबंधन में आसानी होगी और बेंगलुरु की बढ़ती आबादी को पानी मिलेगा।
चुनौतियां और विरोध
तमिलनाडु लगातार इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है। वहां की विधानसभा ने जून 2026 में इसके खिलाफ एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था। तमिलनाडु को डर है कि बांध बनने से कावेरी नदी के पानी पर कर्नाटक का कंट्रोल बढ़ जाएगा और उन्हें मिलने वाला कानूनी हिस्सा प्रभावित होगा।
आर्थिक और पर्यावरणीय जोखिम
प्रोजेक्ट की लागत पर भी बड़ा संकट है। 2018 में इसका बजट ₹9,000 करोड़ आंका गया था, जो अब महंगाई और देरी के कारण बढ़ चुका है। इसके अलावा, बांध का निर्माण क्षेत्र 12,546 एकड़ के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य (Cauvery Wildlife Sanctuary) को प्रभावित करेगा। पर्यावरण संबंधी क्लियरेंस न मिलने से प्रोजेक्ट की लागत और बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है और भविष्य में होने वाली कानूनी सुनवाई और आपसी बातचीत ही इस प्रोजेक्ट की नियति तय करेगी।
