KPMG रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: भारत के फूड सेक्टर में बुनियादी ढांचे की भारी कमी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
KPMG रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: भारत के फूड सेक्टर में बुनियादी ढांचे की भारी कमी

KPMG India की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जरूरत से **36%** ज्यादा भोजन पैदा करता है, फिर भी **52 करोड़** से ज्यादा लोग स्वस्थ आहार नहीं ले पा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन में **10 से 15 मिलियन टन** की भारी कमी है।

उत्पादन ज्यादा, फिर भी चुनौतियां

भारत का कृषि क्षेत्र एक अजीब विरोधाभास का सामना कर रहा है। देश की जरूरत से 36% अधिक अनाज पैदा होने के बावजूद, वास्तविक खपत निर्धारित मानकों से 20% कम है। KPMG की रिपोर्ट इसे उत्पादन की नहीं, बल्कि सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या मानती है।

बर्बादी का गणित

रिपोर्ट के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज की कमी सबसे बड़ा रोड़ा है। इस कमी के चलते भारी मात्रा में फसल खराब हो जाती है:

  • फलों की बर्बादी: 6% से 15%
  • सब्जियों की बर्बादी: 4.8% से 11.6%

यह बर्बादी न केवल कुल सप्लाई को कम करती है, बल्कि फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और रिटेलर्स की लागत बढ़ाकर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डालती है।

निवेशकों के लिए अवसर

निवेशकों के नजरिए से, सप्लाई चेन की दक्षता अब केवल एक सपोर्ट फंक्शन नहीं, बल्कि एक कॉम्पिटिटिव एडवांटेज है। जो कंपनियां कोल्ड चेन तकनीक और एडवांस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में निवेश कर रही हैं, वे लंबी अवधि में बेहतर मार्जिन हासिल कर सकती हैं। सरकार भी PM-Kisan SAMPADA Yojana और PLI स्कीम्स के जरिए इस इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है।

हालांकि, ग्रामीण इलाकों में तकनीक को अपनाना और भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) इस सेक्टर के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो सप्लाई चेन की इन बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठा रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.