KPMG की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल ट्रेड में बढ़ते प्रोटेक्शनिज्म के कारण भारत के लिए **8-10%** की GDP ग्रोथ हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसे बरकरार रखने के लिए अब देश को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI सर्विसेज के एक्सपोर्ट पर ध्यान देना होगा।
भारत के सामने 8-10% की एनुअल GDP ग्रोथ का लक्ष्य है, लेकिन KPMG की हालिया रिपोर्ट बताती है कि अब पुरानी रणनीतियों से काम नहीं चलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में बढ़ते ट्रेड प्रोटेक्शनिज्म और सुरक्षा चिंताओं के कारण चीन की तरह केवल मैन्युफैक्चरिंग के दम पर ग्रोथ हासिल करना अब पहले से कठिन हो गया है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ही है असली मौका
ग्लोबल ट्रेड में जारी तनाव को देखते हुए भारतीय निवेशकों को सचेत रहने की जरूरत है। रिपोर्ट सुझाव देती है कि भारत को अब सिर्फ पारंपरिक एक्सपोर्ट पर निर्भर न रहकर, अपने सफल पेमेंट और आइडेंटिटी सिस्टम जैसे डिजिटल पब्लिक गुड्स और हाई-वैल्यू AI फ्रेमवर्क्स को ग्लोबल मार्केट में भुनाना चाहिए। भारत का यह डिजिटल मॉडल अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक रोल मॉडल बन सकता है, बशर्ते इसे सही तरीके से कमर्शियलाइज किया जाए।
वर्कफोर्स और भविष्य की चुनौतियां
आने वाले समय में AI और डिजिटल स्किल्स भारत की लंबी अवधि की रणनीति का केंद्र होंगे। हालांकि ऑटोमेशन को लेकर चिंताएं हैं, लेकिन रिपोर्ट का मानना है कि ग्लोबल इकॉनमी में स्किल्ड डिजिटल प्रोफेशनल्स की भारी कमी है, जिसे भारत अपनी युवा आबादी के जरिए पूरा कर सकता है। यह जॉब रिप्लेसमेंट नहीं, बल्कि जॉब प्रोफाइल के एवोल्यूशन की तरह है।
ट्रेड एग्रीमेंट्स पर फोकस
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) साइन करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका असली फायदा तब होगा जब सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर काम करें। भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में भारत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कैसे अंतरराष्ट्रीय भरोसे को मजबूत करता है और डिजिटल एवं AI मार्केट में ठोस लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करता है।
