झारखंड की राजधानी रांची में छात्र पिछले 16 दिनों से परीक्षा में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर रचनात्मक व्यंग्य का सहारा ले रहे हैं। यह आंदोलन राज्य में रोजगार प्रक्रियाओं के प्रति गहरे असंतोष को दर्शाता है, और 10 अगस्त, 2026 को आगे भी प्रदर्शन की योजना है।
परीक्षा सुधारों के लिए छात्रों का अनवरत संघर्ष
रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन आज अपने 16वें दिन में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित राज्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ है। JPSC-JSSC सुधार मंच के नेतृत्व में, इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। प्रदर्शनकारियों ने नौकरी की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए एक मॉक 'जॉब सेल' सेंटर भी स्थापित किया है।
मुख्य मांगें और CBI जांच की दरकार
छात्रों के विरोध का मुख्य केंद्र 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा है। उनकी मांग है कि इस परीक्षा को पूरी तरह से रद्द किया जाए और इसमें हुई कथित खामियों और भ्रष्टाचार की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वर्तमान भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और इसमें हेरफेर की संभावना है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के अवसर कम हो जाते हैं।
व्यंग्यात्मक प्रदर्शन और सरकारी प्रतिक्रिया
विरोध स्थल पर, प्रदर्शनकारियों ने 'CM सीट सेल स्कीम' और 'जॉब रेट कार्ड' जैसे पोस्टरों के साथ व्यंग्यात्मक प्रदर्शन किए, जिनमें कथित तौर पर सरकारी पदों के लिए कीमतें सूचीबद्ध थीं। इन तरीकों का उद्देश्य राज्य की रोजगार प्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया में जवाबदेही की कमी के प्रति छात्रों की हताशा को उजागर करना है।
सरकारी स्तर पर, राज्य सरकार ने छात्र संगठनों के साथ कई दौर की बातचीत की है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। छात्र नेताओं ने सरकार के दृष्टिकोण को खारिज कर दिया है और उन पर आंदोलन को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया है, बजाय इसके कि उनकी मुख्य सुधार मांगों को संबोधित किया जाए। इस लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शन ने राज्य के शासन पर महत्वपूर्ण दबाव डाला है, खासकर सार्वजनिक भावना और युवा रोजगार के प्रबंधन के संबंध में।
स्वास्थ्य चिंताएं और आगामी आंदोलन
प्रदर्शन के पैमाने और प्रतिभागियों पर शारीरिक असर को देखते हुए स्थिति गंभीर बनी हुई है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, की सेहत बिगड़ने की खबर है, जिससे मांगों की तात्कालिकता बढ़ गई है। आगे देखते हुए, राज्य के लिए तत्काल निगरानी का विषय 10 अगस्त, 2026 को प्रस्तावित विधानसभा घेराव है। इस आगामी कार्यक्रम से राज्य के अधिकारियों पर भविष्य की परीक्षाओं में प्रणालीगत सुधार और पारदर्शिता की मांगों पर ठोस प्रतिक्रिया देने का दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
