झारखंड में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। Birsa Munda Airport पर **6** उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जबकि नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। बाढ़ से धान और सब्जी की फसलों को बड़ा नुकसान होने का डर है, जिससे लोकल सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और एयर कनेक्टिविटी पर मार
23 सितंबर 2026 से जारी भारी बारिश के कारण रांची के Birsa Munda Airport पर ऑपरेशंस ठप हो गए हैं। खराब विजिबिलिटी और रनवे के आसपास जलभराव के चलते 6 उड़ानों को कैंसिल करना पड़ा। रांची और जमशेदपुर जैसे शहरों में सड़कों पर पानी भरने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
नदियों का जलस्तर और डैम का खतरा
पूर्वी सिंहभूम में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। सुवर्णरेखा और खरकई नदियां खतरे के निशान से 2.02 मीटर और 4.50 मीटर ऊपर बह रही हैं। अधिकारियों ने निचले इलाकों में खाली करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, Kanke Dam का जलस्तर 27.05 फीट तक पहुंच गया है, जो इसकी अधिकतम क्षमता 28 फीट के बेहद करीब है। हटिया और गेतलसूद डैम में भी पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।
खेती-किसानी और सप्लाई चेन पर असर
इस बेमौसम बारिश का सबसे बुरा असर एग्रीकल्चर सेक्टर पर पड़ा है। धान और सब्जियों की फसलें बर्बाद होने से आने वाले समय में इनकी कीमतों में उछाल आ सकता है। हालांकि राज्य में मानसून का घाटा अब मात्र 1% बचा है, लेकिन 11 जिलों में सरप्लस बारिश होने से स्थिति असंतुलित हो गई है।
आगे क्या?
India Meteorological Department के मुताबिक, अगले 12 घंटों में डिप्रेशन के कमजोर होने की उम्मीद है। अभी प्रशासन का पूरा ध्यान फसल के नुकसान के आकलन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर है। निवेशकों को सलाह है कि वे एग्रीकल्चर विभाग की रिपोर्ट पर नजर रखें, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतों और लोकल सप्लाई चेन पर पड़ने वाले वास्तविक असर का पता चलेगा।
