जाने-माने इकोनॉमिस्ट Jeffrey Sachs ने एक बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा कि भारत साल 2100 तक दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है, जिसकी मुख्य वजह देश की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और डेमोग्राफिक विस्तार है।
वाराणसी में 'Ancient Wisdom for Modern Challenges' संगोष्ठी के दौरान Jeffrey Sachs ने भारत के आर्थिक भविष्य पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि सदी के अंत तक भारत की जनसंख्या चीन से दो गुना होने की संभावना है, जो देश की लेबर फोर्स और कुल इकोनॉमिक आउटपुट को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है।
क्या यह जीत पक्की है?
Sachs ने साफ किया कि यह कोई ऑटोमैटिक परिणाम नहीं है। भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एजुकेशन, एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट सेफ्टी जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश करना होगा। इन्हीं आधारों पर देश की लॉन्ग-टर्म प्रोडक्टिविटी टिकी है।
निवेशकों के लिए अहम सबक
इकोनॉमिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जीडीपी (GDP) में सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का मतलब यह नहीं है कि प्रति व्यक्ति आय (Income per person) भी सबसे अधिक होगी। निवेशकों के लिए यह फर्क समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि यही भविष्य में मिडिल क्लास की खपत और कंज्यूमर स्पेंडिंग की ग्रोथ तय करेगा।
फिलहाल, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्राइवेट सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स—जैसे पोर्ट्स, एनर्जी और डिजिटल कनेक्टिविटी—पर किस तरह से कैपिटल खर्च को मैनेज करते हैं। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की ओर बढ़ते भारत को एक स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत होगी, जो इस ग्रोथ को रफ्तार दे सके।
