ECB के पूर्व प्रेसिडेंट Jean-Claude Trichet ने 5वें Kautilya Economic Conclave में भारत की इकोनॉमी पर बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने भारत के ह्यूमन कैपिटल और रिफॉर्म्स को ग्रोथ का इंजन बताया, लेकिन ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं के प्रति आगाह भी किया है।
भारत की ग्रोथ पर ग्लोबल मुहर
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के पूर्व प्रेसिडेंट Jean-Claude Trichet ने नई दिल्ली में आयोजित 5वें Kautilya Economic Conclave में भारत की आर्थिक रफ्तार की जमकर तारीफ की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की तुलना में भारत का रास्ता काफी अलग और उज्ज्वल है। Trichet के मुताबिक, भारत में हाल के वर्षों में किए गए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और लगातार GDP में हो रही बढ़ोतरी ने देश के विकास लक्ष्यों के लिए एक मजबूत नींव तैयार की है।
क्यों खास है भारत की विकास गाथा?
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि Trichet ने भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) और साइंस-इंजीनियरिंग में कुशल मानव संसाधन को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया है। उनका मानना है कि यही टैलेंट पूल भारत को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है। साथ ही, उन्होंने 'मिडल-इनकम ट्रैप' (Middle-income trap) के जोखिम पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत के पास अभी इनोवेशन और सर्विसेज के क्षेत्र में विस्तार के काफी अवसर मौजूद हैं।
बाहरी जोखिमों पर सावधानी जरूरी
इतनी सकारात्मकता के बावजूद, Trichet ने एक चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल इकोसिस्टम से अलग नहीं है। बढ़ती भू-राजनीतिक (Geopolitical) अस्थिरता और ग्लोबल ट्रेड में आ रहे बदलाव भारत की लॉन्ग-टर्म राह में बाधा बन सकते हैं। सप्लाई चेन में बदलाव और दुनिया भर में बढ़ते प्रोटेक्शनिज्म का असर उन सेक्टर्स पर दिख सकता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर निर्भर हैं।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था अपने घरेलू सुधारों को जारी रखते हुए इन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करती है।
