जापानी कंपनियां अब केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत में AI और R&D के हाई-टेक हब तैयार कर रही हैं। संचयी FDI **$48.14 बिलियन** तक पहुंच गया है और अब **$68 बिलियन** के निवेश रोडमैप पर फोकस है।
भारत में जापानी कंपनियों की मौजूदगी 2026 में एक नए स्तर पर पहुंच गई है। वर्तमान में देश भर में 1,463 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें 4,59,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। पहले जहां यह संबंध मुख्य रूप से भारी मैन्युफैक्चरिंग पर टिका था, वहीं हालिया डेटा एक बड़ी रणनीति बदलाव की ओर इशारा करता है। यह बदलाव एक 10-वर्षीय निवेश रोडमैप पर टिका है, जिसमें ¥10 ट्रिलियन यानी लगभग $68 बिलियन का प्राइवेट निवेश करने का लक्ष्य रखा गया है।
टेक्नोलॉजी की ओर बड़ा कदम
सबसे बड़ा बदलाव ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार में दिख रहा है। ये विशेष ऑफिस R&D, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सर्विसेज पर काम कर रहे हैं। भारत में फिलहाल ऐसे 75 से 100 सेंटर काम कर रहे हैं। जापानी बोर्डरूम अब भारत को केवल प्रोडक्शन हब नहीं, बल्कि ग्लोबल इनोवेशन का एक मुख्य केंद्र मान रहे हैं।
आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो मार्च 2026 तक जापान से संचयी FDI $48.14 बिलियन तक पहुंच गया है। केवल फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 में ही $3.75 बिलियन का ताजा निवेश आया है।
ग्रोथ और चुनौतियां
भले ही यह निवेश लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का संकेत है, लेकिन निवेशकों को कुछ जमीनी हकीकतों पर भी नजर रखनी होगी। पिछले फाइनेंशियल ईयर में ट्रेड डेफिसिट का अंतर लगभग $15.4 बिलियन रहा। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) जैसे नियमों के तहत प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन की प्रक्रियाएं कभी-कभी ऑपरेशनल बाधाएं पैदा करती हैं।
अगले चरण में यह साझेदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां हाई-वैल्यू सर्विसेज की ओर अपना संक्रमण कितनी कुशलता से करती हैं और स्थानीय स्तर पर स्किल्ड टैलेंट की उपलब्धता को कैसे मैनेज करती हैं।
