जापान में **30-साल** के सरकारी बॉन्ड की नीलामी हो रही है, जहां यील्ड रिकॉर्ड **4.155%** के करीब पहुंच गई है। यह घटना वैश्विक बाजार के लिए अहम है क्योंकि इससे जापानी निवेशक अपनी विदेशी संपत्ति बेचकर पैसा स्वदेश वापस ला सकते हैं, जिससे ग्लोबल लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ सकता है।
जापान में आज एक हाई-प्रोफाइल 30-साल के सरकारी बॉन्ड (JGB) की नीलामी हो रही है। यह नीलामी ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर कर्ज बाजार (Debt Market) में भारी गिरावट देखी जा रही है। नीलामी से पहले ही यील्ड बढ़कर 4.155% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो महंगाई की चिंता और Bank of Japan द्वारा मौद्रिक नीति सख्त करने की उम्मीदों को दर्शाता है।
क्यों चिंता में हैं ग्लोबल निवेशक?
सालों तक, जापान के बड़े लाइफ इंश्योरेंस और पेंशन फंड्स ने अमेरिका जैसे देशों के विदेशी कर्ज में भारी निवेश किया था, क्योंकि जापान में यील्ड शून्य या नकारात्मक थी। अब, जब घर बैठे ही बेहतर रिटर्न मिल रहा है, तो निवेशक विदेशी संपत्तियों को बेचकर पैसा वापस जापान ला रहे हैं। अगस्त 2026 तक, जापानी निवेशकों ने अरबों येन की विदेशी संपत्ति बेची है, जो एक बड़ा संकेत है।
ग्लोबल मार्केट पर क्या असर होगा?
अगर जापान की पूंजी बड़ी मात्रा में वापस लौटती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) घट जाएगी। इससे अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है और ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए उधार लेना महंगा हो सकता है, जिससे कंपनियों के वैल्यूएशन पर असर पड़ना तय है।
फिस्कल पॉलिसी का दबाव
प्रधानमंत्री Sanae Takaichi की विस्तारवादी आर्थिक नीति (Expansionary Fiscal Agenda) ने भी बॉन्ड बाजार में चिंताएं पैदा कर दी हैं। जापान का कर्ज-से-GDP अनुपात पहले से ही दुनिया में सबसे अधिक है। रिकॉर्ड बजट अनुरोधों और ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेने की मजबूरी के कारण बॉन्ड होल्डर्स सतर्क हैं और ज्यादा प्रीमियम की मांग कर रहे हैं।
अब नजरें इस बात पर हैं कि नीलामी में मांग कितनी रहती है। नीलामी के नतीजे और Bank of Japan की अगली बैठकें यह तय करेंगी कि क्या ग्लोबल यील्ड में यह उछाल जारी रहेगा या बाजार को स्थिरता मिलेगी।
