जापानी येन दशकों के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। इसकी मुख्य वजह है ग्लोबल निवेशकों का कम ब्याज दर वाले जापानी येन में पैसा उधार लेकर, ज़्यादा रिटर्न वाले विदेशी एसेट्स में निवेश करना। इस 'कैर्री ट्रेड' (Carry Trade) की वजह से येन पर भारी दबाव है और जापान के लिए आयात महंगा हो गया है।
येन पर दबाव का कारण: कैर्री ट्रेड
जापानी येन पर लगातार दबाव बना हुआ है और यह दशकों में नहीं देखे गए स्तरों तक गिर गया है। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह 'कैर्री ट्रेड' (Carry Trade) नाम की एक खास फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी है। इस रणनीति में, ग्लोबल निवेशक जापान में बहुत कम ब्याज दरों का फायदा उठाते हुए येन में पैसा उधार लेते हैं। फिर, वे इस पैसे को अमेरिकी डॉलर जैसी दूसरी करेंसी में बदलकर उन एसेट्स में निवेश करते हैं जहाँ ज़्यादा रिटर्न मिलता है, जैसे कि विदेशी सरकारी बॉन्ड या शेयर।
ब्याज दर के अंतर का खेल
इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ा कारण जापान और दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ब्याज दरों का भारी अंतर है। जहाँ दूसरे देशों के सेंट्रल बैंकों ने महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरें बढ़ाईं, वहीं बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) ने लंबे समय तक उधार लेने की लागत को लगभग शून्य के करीब बनाए रखा। कुछ मामूली नीतिगत बदलावों के बावजूद, येन उधार लेने की लागत अभी भी दूसरी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में काफी कम है। इससे निवेशकों को लगातार जापान से बाहर पैसा निकालने का प्रोत्साहन मिलता है, जिससे करेंसी मार्केट में येन की सप्लाई बढ़ जाती है और इसकी कीमत गिर जाती है।
जापानी अर्थव्यवस्था पर असर
येन की कमजोरी जापान के लिए एक मिली-जुली आर्थिक स्थिति पैदा करती है। एक तरफ, सस्ता येन जापानी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए ज़्यादा किफायती बनाता है, जिससे बड़े जापानी एक्सपोर्टर्स के मुनाफे में बढ़ोतरी होती है। दूसरी तरफ, घरेलू खपत के लिए यह एक बड़ा झटका है। जापान ऊर्जा, कच्चे माल और भोजन जैसी ज़रूरी चीज़ों के लिए आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। कमजोर करेंसी इन चीज़ों को बहुत महंगा बना देती है। इससे महंगाई बढ़ती है, जो जापानी परिवारों की खरीदने की क्षमता को कम कर सकती है और उन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है जो आयातित चीज़ों पर निर्भर करती हैं।
बाज़ार में बड़े उतार-चढ़ाव का खतरा
कैर्री ट्रेड की स्ट्रैटेजी ब्याज दर की नीतियों में बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। अगर बैंक ऑफ जापान आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला करता है, या अगर दूसरे देश की सेंट्रल बैंक दरें घटाना शुरू कर देते हैं, तो येन में उधार लेने का प्रोत्साहन खत्म हो सकता है। ऐसी स्थिति में, निवेशकों को अपने विदेशी एसेट्स बेचने और कर्ज चुकाने के लिए येन वापस खरीदने की ज़रूरत पड़ सकती है। इस प्रक्रिया को 'अनवाइंडिंग' (Unwinding) कहा जाता है और यह ग्लोबल बॉन्ड और स्टॉक मार्केट में अचानक और तेज़ उतार-चढ़ाव ला सकती है। इसी जोखिम को देखते हुए, जापानी वित्तीय अधिकारियों ने करेंसी की अस्थिरता पर चिंता जताई है और कभी-कभी बाज़ार में तेज़ गिरावट को रोकने के लिए फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में दखल भी दिया है। येन की भविष्य की स्थिरता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि जापानी ब्याज दरों और वैश्विक दरों के बीच का अंतर कम होना शुरू होता है या नहीं, चाहे वह टोक्यो में नीतिगत बदलावों से हो या अन्य प्रमुख बाजारों में आर्थिक परिवर्तनों से।
