जापान के फाइनेंशियल मार्केट में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। येन की कीमत डॉलर के मुकाबले **160** के स्तर के पास पहुंच गई है, जबकि बॉन्ड यील्ड्स भी लगातार ऊपर जा रहे हैं।
जापान में इस समय बाजार का माहौल काफी अनिश्चित बना हुआ है। टोक्यो की सरकारी नीतियों को लेकर स्पष्ट संचार (communication) की कमी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। प्राइम मिनिस्टर Sanae Takaichi की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े खर्चों और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के बीच संतुलन बनाने की है।
बाजार में तनाव की मुख्य वजह
सरकारी खर्चों को लेकर अपनाई गई विस्तारवादी नीति बाजार के लिए पहेली बनी हुई है। सरकार ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए रिकॉर्ड 8.9 ट्रिलियन येन यानी लगभग 56 बिलियन डॉलर का डिफेंस बजट प्रस्तावित किया है। इसके अलावा खाने-पीने की जरूरी चीजों पर टैक्स कटौती के फैसले ने भी ग्लोबल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विदेशी निवेशकों को डर है कि बिना किसी स्पष्ट रोडमैप के यह नीतियां कर्ज का बोझ और बढ़ा सकती हैं।
विदेशी भागीदारी का असर
पुराने समय के मुकाबले अब जापानी बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है। Bank of Japan के अपने पुराने बॉन्ड-बाइंग रुख को बदलने के बाद, विदेशी पूंजी ने इस खाली जगह को भरा है। बॉन्ड यील्ड्स में हो रही तेजी के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि विदेशी निवेशक अब हर छोटे नीतिगत संकेत पर बहुत तेजी से रिएक्ट करते हैं।
ग्लोबल मार्केट पर खतरा
येन में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड्स का बढ़ना ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए रिस्क बन सकता है। 'Carry Trade' के जरिए निवेशक येन का इस्तेमाल सस्ते कर्ज के तौर पर करते रहे हैं। यदि जापानी सरकार अपनी करेंसी को बचाने के लिए U.S. Treasuries जैसे विदेशी रिजर्व बेचने के लिए मजबूर होती है, तो इसका असर लिक्विडिटी के रूप में उभरते बाजारों (emerging markets) पर पड़ सकता है। फिलहाल, निवेशक टोक्यो से और अधिक स्पष्टता और ठोस आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
