Japan Business Sentiment: ब्याज दरों में **1.25%** की बढ़ोतरी के बावजूद जापान का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Japan Business Sentiment: ब्याज दरों में **1.25%** की बढ़ोतरी के बावजूद जापान का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत

Bank of Japan के सितंबर 2026 के सर्वे के मुताबिक, जापान के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भरोसा बढ़कर **+24** पर पहुंच गया है, हालांकि नॉन-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती दिखी है। **1.25%** की ब्याज दरें और कमजोर येन के बीच ग्लोबल इन्वेस्टर्स की नजरें इस पर टिकी हैं।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जोश

Bank of Japan के सितंबर 2026 के 'Tankan' सर्वे में जापानी कंपनियों का मिला-जुला रुख सामने आया है। बड़े मैन्युफैक्चरर्स का सेंटिमेंट इंडेक्स पिछली तिमाही के +22 से बढ़कर +24 हो गया है। यह लगातार छठी तिमाही है जब इस सेक्टर में सुधार देखा गया है, जिसका मुख्य श्रेय टेक और AI-रिलेटेड प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को जाता है। हालांकि, बड़े नॉन-मैन्युफैक्चरर्स का मनोबल +37 से गिरकर +35 पर आ गया है, जो एक साल में पहली गिरावट है।

यह डेटा ऐसे समय में आया है जब जापान का सेंट्रल बैंक पिछले तीन दशकों के सबसे आक्रामक मॉनेटरी पॉलिसी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। महंगाई को काबू में रखने के लिए बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट को 1.25% तक बढ़ाया गया है, जिससे उन कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है जो लंबे समय से जीरो-इंटरेस्ट रेट्स की आदी थीं।

इम्पोर्ट कॉस्ट और महंगाई की मार

जापानी कंपनियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। येन की कीमत डॉलर के मुकाबले 160 के आसपास बनी हुई है, जिससे कच्चे माल का इम्पोर्ट बहुत महंगा हो गया है। साथ ही, ब्रेंट क्रूड ऑयल $98 प्रति बैरल के आसपास होने से ऊर्जा पर निर्भर कंपनियों का मुनाफा दबाव में है। सर्वे में यह भी सामने आया कि कंपनियां अब अगले तीन साल तक महंगाई दर 2.6% के आसपास रहने का अनुमान लगा रही हैं।

ग्लोबल मार्केट पर असर

ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए 'Tankan' रिपोर्ट काफी अहम है क्योंकि जापान लंबे समय से कम लागत वाले कैपिटल का मुख्य स्रोत रहा है। जैसे-जैसे बैंक ऑफ जापान दरें बढ़ा रहा है, 'कैरी ट्रेड' (Carry Trade) पर भारी दबाव है। यदि केंद्रीय बैंक ने और सख्ती की, तो ग्लोबल लिक्विडिटी कम हो सकती है, जिसका असर इमर्जिंग मार्केट्स पर भी पड़ेगा।

इसके अलावा, जापान की बढ़ती उम्र और लेबर की कमी जैसी संरचनात्मक समस्याएं लंबे समय से उत्पादकता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। फिलहाल प्राइवेट सेक्टर में बढ़ती दरों को झेलने की क्षमता है, लेकिन आगे की स्थिति नाजुक है। अब सबकी नजरें सेंट्रल बैंक की आने वाली मीटिंग्स पर हैं कि क्या आगे और भी रेट हाइक किए जाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.