J&K प्रशासन ने सर्दियों के लिए आधिकारिक तौर पर जम्मू में कामकाज शिफ्ट कर दिया है। 2021 में बंद हुई ऐतिहासिक 'दरबार मूव' परंपरा को फिर से बहाल किया गया है, जिसका मकसद क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार, 2 नवंबर, 2026 को अपनी शीतकालीन राजधानी जम्मू से कामकाज आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। यह 154 साल पुरानी 'दरबार मूव' परंपरा का एक नया अध्याय है, जिसके तहत ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और शीतकालीन राजधानी जम्मू के बीच सिविल सचिवालय और मुख्य सरकारी दफ्तरों को साल में दो बार स्थानांतरित किया जाता है।
इतिहास और बदलाव का कारण
1872 में डोगरा शासन के दौरान शुरू हुई यह प्रशासनिक प्रक्रिया 2021 में पिछली सरकार द्वारा बंद कर दी गई थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य राजकोषीय अनुशासन (fiscal austerity) लाना और डिजिटल ई-ऑफिस सिस्टम को बढ़ावा देना था, ताकि कर्मचारियों और रिकॉर्ड्स के स्थानांतरण पर होने वाले भारी खर्च को बचाया जा सके।
अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे फिर से बहाल करने का फैसला किया है। जम्मू क्षेत्र के लिए, इस परंपरा की वापसी एक आर्थिक प्रोत्साहन की तरह है। हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट और रिटेल जैसे स्थानीय व्यवसायों के लिए सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों का आना एक बड़ी व्यापारिक गतिविधि के रूप में देखा जाता है।
वित्तीय बहस
यह फैसला प्रशासन की रणनीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है। जहां समर्थक इसे दोनों क्षेत्रों के बीच प्रशासनिक तालमेल के लिए जरूरी मानते हैं, वहीं आलोचकों का तर्क है कि हजारों कर्मचारियों और जरूरी फाइलों को शिफ्ट करने की लागत को उन दक्षता लाभों के साथ तौलना होगा जो पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से हासिल किए गए थे। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि सरकार पारंपरिक प्रशासनिक मौजूदगी और डिजिटल ई-गवर्नेंस के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
