जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में राज्य में **₹5,824 करोड़** का औद्योगिक निवेश आया है, जिसके पीछे स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों का फॉर्मलाइजेशन मुख्य वजह है।
स्टार्टअप और MSME का जोर
जम्मू-कश्मीर का औद्योगिक नक्शा अब तेजी से बदल रहा है। भारी उद्योगों पर निर्भरता कम हो रही है और स्टार्टअप्स व छोटे उद्योगों का इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। स्टार्टअप्स की संख्या जो 2021 में सिर्फ 69 थी, वो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अंत तक बढ़कर 1,306 हो गई है। सबसे बड़ा बदलाव 'उद्यम' पोर्टल पर दिख रहा है, जहां रजिस्टर्ड इकाइयों की संख्या 24,000 (FY22) से उछलकर 6 लाख के पार पहुंच गई है। इससे इन छोटे व्यवसायों के लिए बैंक और NBFC से लोन लेना आसान हो गया है।
भविष्य की पाइपलाइन
निवेश का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। राज्य में 312 नई औद्योगिक इकाइयां पाइपलाइन में हैं, जिनमें ₹7,864 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। 'न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम' इसके लिए बड़ा कैटलिस्ट साबित हुई है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि ये इकाइयां कितनी जल्दी उत्पादन शुरू करती हैं, खासकर पॉलीमर और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में।
रिस्क और चुनौतियां
विकास के साथ कुछ चुनौतियां भी बरकरार हैं। लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी एक बड़ा फैक्टर है, जो बिजनेस मार्जिन तय करेगा। इसके अलावा, क्लाइमेट कंडीशंस और बाहरी झटकों का असर बागवानी (Horticulture) और बिजनेस सेंटीमेंट पर पड़ सकता है। सरकार ने 'MSME हेल्थ क्लिनिक' शुरू किया है जो 3 लाख से अधिक यूनिट्स पर नजर रखे हुए है, ताकि किसी भी संकट के समय उन्हें समय पर मदद मिल सके।
