J&K में 70 लाख ज़मीनों का डिजिटाइजेशन: AgriStack से खेती में आएगी क्रांति!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
J&K में 70 लाख ज़मीनों का डिजिटाइजेशन: AgriStack से खेती में आएगी क्रांति!

जम्मू और कश्मीर सरकार ने केंद्र के AgriStack फ्रेमवर्क के साथ जुड़ने के लिए **70 लाख** से ज़्यादा ज़मीनों का डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया है। इस कदम से खेती-किसानी से जुड़ी सेवाओं को आसान बनाने और किसानों को लोन (Farm Credit) दिलाने में मदद मिलेगी। हालाँकि, रिकॉर्ड की सटीकता और इसे लागू करने में कुछ चुनौतियाँ भी आ सकती हैं।

ज़मीनों का डिजिटल डेटाबेस तैयार

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए, लगभग 70 लाख ज़मीनों के रिकॉर्ड को डिजिटाइज़ कर लिया है। इसका मकसद पुराने मैनुअल रिकॉर्ड्स की जगह एक आधुनिक, डिजिटल डेटाबेस बनाना है, जो केंद्र सरकार के AgriStack फ्रेमवर्क से जुड़ेगा। इससे खेती-किसानी से जुड़ी सेवाओं, जैसे कि फसल की योजना बनाने, किसानों को लोन (Credit Disbursement) देने और सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में एक मज़बूत आधार मिलेगा।

13 लाख से ज़्यादा गलतियाँ सुधारीं

सिर्फ कागज़ात को स्कैन करना ही काफी नहीं था। डेटा को एकदम सही बनाने के लिए, अधिकारियों ने बारीकी से जाँच-पड़ताल की और 13 लाख से ज़्यादा गलतियों को ठीक किया। ये सुधार लोगों की शिकायतों और फील्ड वेरिफिकेशन के ज़रिए किए गए, ताकि यह पक्का हो सके कि रिकॉर्ड ज़मीन के मौजूदा मालिकाना हक़ और हिस्सेदारी को सही-सही दिखा रहे हैं। राजस्व विभाग (Revenue Department) ने डेटा एंट्री, वेरिफिकेशन और अप्रूवल के लिए तीन-स्तरीय सिस्टम लागू किया है, जिसमें हर बदलाव का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखा जा रहा है।

AgriStack और खेती पर असर

AgriStack, भारत के खेती-किसानी क्षेत्र के लिए एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करेगा। ज़मीनी रिकॉर्ड्स को एकीकृत करके, इस सिस्टम का लक्ष्य एक यूनिक फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाना है, जो जियो-रेफरेंस्ड मैप्स और ई-केवाईसी (e-KYC) डेटा से जुड़ा होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह बड़ा कदम है क्योंकि ज़मीन के मालिकाना हक़ और डिजिटल रिकॉर्ड्स को साफ़ होने से किसानों के लिए संस्थागत लोन (Institutional Credit), फसल बीमा (Crop Insurance) और अलग-अलग सब्सिडी पाना आसान हो जाएगा। जब ज़मीन का डेटा मशीनों द्वारा पढ़ा जा सकेगा और वेरीफाई हो सकेगा, तो बैंक और वित्तीय संस्थान लोन देने की प्रक्रिया को तेज़ कर सकते हैं।

टेक्नोलॉजी और चुनौतियाँ

इस पहल के लिए BISAG-N और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के सहयोग से एक ख़ास सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच जहाँ पारदर्शिता बढ़ाता है, वहीं इसमें कुछ दिक्कतें भी हैं। बड़े पैमाने पर डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट्स में अक्सर 'ग्राउंड-ट्रूथिंग' से जुड़ी चुनौतियाँ आती हैं, जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड और ज़मीन पर असल कब्ज़े में कभी-कभी अंतर हो सकता है, जिससे ज़मीन विवाद पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा, लंबित उत्तराधिकार उत्परिवर्तन (Inheritance Mutations) और ई-केवाईसी (e-KYC) के दौरान संभावित प्रमाणीकरण विफलताएँ (Authentication Failures) देरी का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञ इस बात पर भी नज़र रखेंगे कि क्या एक केंद्रीयकृत सिस्टम से ऐतिहासिक रिकॉर्ड की गलतियाँ सामने आने और ठीक होने पर कानूनी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।

आगे क्या देखना होगा?

इस पहल की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक, बीमा कंपनियाँ और खेती-किसानी से जुड़े अन्य बिज़नेस इस वेरीफ़ाई किए गए डेटा का अपने कामकाज में कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल करते हैं। खेती-किसानी क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले निवेशक और विश्लेषक यह देखेंगे कि AgriStack को दूसरे राज्यों में कैसे लागू किया जाता है, क्योंकि यह डिजिटल ढाँचा पूरे देश में खेती-किसानी के डेटा के इस्तेमाल और भविष्य के लोन और संसाधनों के आवंटन को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.