Jammu and Kashmir विधानसभा ने राज्य का दर्जा (Statehood) तुरंत बहाल करने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव पास कर दिया है। मुख्यमंत्री Omar Abdullah के नेतृत्व में आए इस प्रस्ताव के विरोध में BJP के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया, जिससे श्रीनगर और दिल्ली के बीच तनातनी के संकेत मिल रहे हैं।
प्रशासनिक मोर्चे पर क्या चुनौतियां?
प्रस्ताव को पेश करते हुए मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रशासन 'Business Rules' के अभाव में काम करने को मजबूर है। उनके अनुसार, इन नियमों के न होने से सरकार रेवेन्यू और स्थानीय निकायों जैसे प्रमुख विभागों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रख पा रही है। इस प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण Advocate General जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियां अधूरी पड़ी हैं, जिससे कामकाज पर असर पड़ रहा है।
केंद्र-राज्य के बीच टकराव की स्थिति
यह राजनीतिक विवाद अब एक गंभीर मोड़ पर है। Supreme Court ऑफ इंडिया पहले ही कह चुका है कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल होना चाहिए। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार राज्य के दर्जे को सुरक्षा स्थितियों से जोड़कर देख रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों को जोड़ना, चुनी हुई सरकार के हाथ से एडमिनिस्ट्रेटिव पावर छीनने जैसा है।
अब निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की नजर इस बात पर है कि क्या यह प्रस्ताव श्रीनगर और दिल्ली के बीच किसी ठोस बातचीत का रास्ता खोलेगा या फिर प्रशासनिक गतिरोध की स्थिति अभी और बनी रहेगी।
